केरी भारत पहुंचे, अमरीका में इस्तीफे की मांग

Thursday, July 31, 2014

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john-kerry foreign secretary of usa

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: अमरीका में इजरायल-हमास के बीच शांति वार्ता करवाने में असफल रहने के कारण जॉन केरी के बारे में लिखा जा रहा है कि उन्हें इस्तीफे के बारे में सोचना चाहिये. इधर, अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी अपनी तीन दिनों की सरकारी यात्रा पर बुधवार को भारत पहुंचे. इस दौरे के दौरान केरी वार्षिक भारत-अमरीकी रणनीतिक वार्ता में हिस्सा लेंगे और माना जाता है कि सितंबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा की बुनियाद भी रखेंगे जबकि अमरीका में आज की तारीख में जॉन केरी को एक असफल व्यक्ति माना जा रहा है.

केरी अपनी यात्रा के दौरान भारतीय समकक्ष सुषमा स्वराज के साथ संयुक्त रूप से पांचवें वार्षिक भारत-अमरीका रणनीतिक वार्ता में गुरुवार 3 बजे दिन में शामिल होंगे और इसके बाद प्रतिनिधि स्तरीय वार्ता होगी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने संवाददाताओं से यहां कहा कि वार्ता के बाद केरी और सुषमा दोनों ही मीडिया से मुखातिब होंगी. अकबरुदद्दीन ने कहा, “भारत अमरीका के संबंध में स्थायी और परिपक्व विकास हुआ है और सुषमा स्वराज एवं केरी के बीच मुलाकात में द्विपक्षीय रिश्ते को मजबूती प्रदान करने के लिए नई संभावनाओं एवं पहल की तलाश की जाएगी.”

उधर, वाशिंगटन पोस्ट में जेनिफऱ रूबिन अपने ब्लाग में लिखते हैं कि बदनाम जॉन केरी के इस्तीफे का समय आ गया है. वाशिंगटन पोस्ट में ‘टाइम फॉर द डिसक्रेडिटेड जॉन केरी टू रीजाइन’ शीर्षक वाले लेख में कहा गया है कि आज की तारीख में जॉन केरी को सभी कोस रहें हैं, इजरायल, पैलेसटिनियन अथॉरिटी, अमरीकी मीडिया, इजरायली मीडिया, मिश्र तथा पूर्व सलाहकार. उनके बारे में कहा जा रहा है कि वे रशिया तथा सीरिया में वार्ता करने में भी असफल रहें हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि ओबामा प्रसासन के जिस विदेश मंत्री की अपनी विदेश नीति को लेकर वहां के मीडिया में कटु आलोचना हो रही है वह शख्स, भारत जैसे बड़े देश के साथ कौन सी सफल वार्ता करने जा रहा है. गौरतलब है कि अमरीका के लिये मौजूदा दौर में जब मोदी भारत के प्रधानमंत्री बन गये हैं वार्ता का दौर उतना सहज नहीं रहेगा जितना मनमोहन सिंह के दौर में हुआ करता था. जॉन केरी के लिये अमरीकी नीतियों को भारत में अमलीजामा पहनाने के लिये मात्र सरकार से बात करना काफी नहीं है. ऐसे में क्या जॉन केरी उम्मीद कर सकते हैं कि मोदी सरकार वालमार्ट को भारत आने की इजाजत देगा.

जॉन केरी के लिये भारत आने से पहले, अमरीकी धरती पर मोदी का गुणगान करना एक अच्छी रायनयिक शुरुआत माना जा सकता है परन्तु इससे उन्हें कुछ हासिल होगा इसमें शक है.

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