कश्मीर में पैलेट गन का विकल्प मिला

Saturday, August 27, 2016

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कश्मीर में उपद्रव

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: जल्द ही कश्मीर में पैलेट गन के स्थान पर पावा शेल्स का उपयोग शुरु हो सकता है. पैलेट गन के उपयोग से उपजे विवाद के बाद गृह मंत्रालय की एक्सपर्ट कमेटी ने पैलेट गन के विकल्प के तौर पर पावा शेल्स को हरी झंडी दिखाई है. पावा शेल मिर्ची के गोले हैं जिससे टारगेट को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता है. इन गोलों को किसी टारगेट पर दागे जाने के कुछ मिनटों के लिए एकदम स्थिर हो जाता है. पावा शेल्स, पैलेट गन के समान असरदार तथा उससे कम घातक माना जा रहा है.

गौरतलब है कि कश्मीर में सेना पत्थरबाज प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल कर रही है. पैलेट गन में छोटे-छोटे छर्रे होते हैं, जो टारगेट के शरीर में जाकर चुभ जाते हैं. पैलेट गन से सुरक्षाबल बेकाबू भीड़ को नियंत्रण करते है. इस गन के इस्तेमाल के बाद ऐसे मामले सामने आए हैं. जिनमें घायलों ने अपनी आंखों की रोशनी तक खो दिया.

घाटी में 2010 के बाद पहली बार इस तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं. साल 2010 में हुई हिंसा में 100 लोगों की मौत हुई थी. पैलेट गन का पहली बार इस्तेमाल उसी दौरान हुआ था. पैलेट से घायल हुए लोगों के घाव भरने में लंबा समय लगता है और निशान रह जाते हैं. कई बार पैलेट गन के कारण हुए गहरे घावों की सर्जरी तक करनी पड़ती है.

हाल ही में जम्मू-कश्मीर दौरे पर गए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने दो-तीन दिनों के भीतर ही विवादित पैलेट गन का विकल्प देने की बात कही, और एक्सपर्ट कमेटी मिर्ची के इन गोलों को विकल्प के तौर पर देख रही है. हालांकि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.

दरअसल, PAVA यानी पेलागॉर्निक एसिड वनीलल अमाइड को नॉनिवमाइड के नाम से भी जाना जाता है. यह प्राकृतिक काली मिर्च में पाया जाने वाला कार्बनिक यौगिक है. इसका प्रयोग किसी व्यक्ति को कुछ समय के लिए परेशान कर सकता है और वह थोड़ी देर तक कुछ न कर पाने की हालत में जा सकता है. इससे ज्यादा ये गोले हानि नहीं पहुंचाते हैं.

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