झीरम कांड: हमला या साजिश

Friday, March 18, 2016

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बस्तर नक्सली हमला

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी कांड की सीबीआई जांच की जरूरत आखिर तीन साल बाद क्यों पड़ी? छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस मामले की सीबीआई जांच की घोषणा के बाद सबसे बड़ा यही सवाल उभरकर सामने आया है.

सूबे के मुखिया डॉ. रमन सिंह ने इस सवाल के जवाब में केवल यही कहा है कि अब तक एनआईए मामले की जांच कर रही थी, यह जांच पूरी होने के बाद अब लगता है कि मामले से जुड़ा कोई तथ्य सामने नहीं आया है तो वह सीबीआई जांच से सामने आ जाएगा.

सरकार को कभी किसी जांच से परहेज नहीं रहा, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि कहीं सीबीआई जांच के आदेश का संबंध सीडी मेकर फिरोज सिद्दीकी के उस दावे से तो नहीं है, जिसने हाल ही में यह दावा किया है वह झीरम घाटी कांड की सीडी जारी करेगा और देश की सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश को उजागर करेगा.

हाल ही में उजागर हुए छत्तीसगढ़ के चर्चित अंतागढ़ टेप कांड के सूत्रधार माने जाने वाले फिरोज के इस दावे को लेकर प्रदेश के राजनीतिक हल्कों में खासी सरगर्मी है. यह भी माना जाता है कि इस व्यक्ति के पास कई बड़े राजनेताओं के काले कारनामे से भरी सीडीए ऑडियो-वीडियो भी है.

अंतागढ़ कांड से पहले भी वह सनसनी फैलाने वाले टेप जारी कर चुका है. इधर पिछले दिनों इस संवाददाता से बातचीत में फिरोज ने दावा किया था कि उसके पास झीरम घाटी से संबंधित टेप है, वह इसे उजागर करने की तैयारी में है. लेकिन ऐसा करने से पहले वह दिल्ली जाकर सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर जज से यह सलाह लेने की कोशिश में है कि यह टैप किस तरीके से उजागर किया जाए?

क्या यह टेप सबूत बन सकता है? इस टेप से जुड़े कानूनी पहलू क्या हो सकते हैं? यह टेप जारी करना उचित होगा या नहीं? फिरोज ने ये सारी बातें किस मकसद से कहीं, यह तो साफ नहीं है, लेकिन वह अपने इस दावे पर कायम है कि उसके पास झीरम से जुड़े सुबूत मौजूद हैं.

वहीं दूसरी तरफ मरवाही विधायक अमित जोगी ने विधानसभा में कहा, “अंतागढ़ टेप कांड में किसी को सुपारी देकर मेरी राजनीतिक हत्या का प्रयास किया गया है. बिना किसी जांच के बिना कुछ साबित हुए, केवल आरोपों के आधार पर हमें बदनाम किया गया. हमारी सहनशीलता की भी सीमा है.”

उन्होंने कहा, “अब अगर किसी ने हमें फंसाने की कोशिश की तो छत्तीसगढ़ में जो हमारा अपार जनाधार है वो साजिशकर्ताओं का राजनीतिक अस्तित्व मिटा देगा. अमित ने अनुदान मांगों पर हुई चर्चा के दौरान कहा कि प्रशासनिक और संसदीय व्यवस्था प्रमाणिकता के आधार पर चलती है, आरोपों के आधार पर नहीं.”

अमित जोगी ने कहा, “महामंत्री पद का लालचए पैसे का प्रलोभन, पत्रकारिता का दुरुपयोग, पद का दुरुपयोग, एक सजायाफ्ता मुजरिम, सारे मसाले हैं इस पिक्चर में. हमारे विरोधी हमारे खिलाफ चाहे कितने भी टैप, वीडियो, डीवीडी, सीडी, मूवी, प्रोड्यूस करें, डायरेक्ट करें और रिलीज करें. उनकी ये पिक्चर छत्तीसगढ़ में नहीं चलने वाली.”

उन्होंने कहा, “पुलिस से जांच, एसआईटी से जांच, इससे जांच, उससे जांच, हम तो सीबीआई से जांच कराने की मांग करते हैं.”

जोगी ने कहा कि तथाकथित टेप केवल एक राजनीतिक साजिश है और कुछ नहीं. अगर अभी इस सदन में ‘गुप्त मतदान’ की व्यवस्था करा दिया जाए तो सदन में मौजूद 98 फीसदी विधायक इसके खिलाफ वोट देंगे. दो फीसदी विधायक क्यों इसका समर्थन करेंगे, ये बताने की जरूरत नहीं है.

गौरतलब है की झीरम कांड को लेकर शुरू से कहा और माना जा रहा है कि यह महज नक्सली वारदात न होकर एक राजनीतिक साजिश का मामला है. एनआईए ने मामले की पूरी जांच कर चालान भी पेश कर दी है, लेकिन अब तक यह रहस्य अनसुलझा है कि क्या यह नक्सली हमला था या राजनीतिक साजिश. (एजेंसी के इन पुट पर आधारित)

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