इराक युद्ध गलत सूचनाओं पर आधारित

Thursday, July 7, 2016

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सद्दाम हुसैन

लंदन | समाचार डेस्क: इराक युद्ध की जांच के लिये बनी ब्रिटिश रिपोर्ट में कहा गया है यह गलत खुफिया जानकारियों पर आधारित था. इसके लिये तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर पर ऊंगली उठाई गई है. इराक के खिलाफ़ जंग में शामिल होने के टोनी ब्लेयर के फैसले को दोषपूर्ण कहा गया है. जॉन शिलकॉट का निष्कर्ष है कि शांतिपूर्ण विकल्प तलाशने के पहले ही ब्रिटेन इराक के खिलाफ़ युद्ध में शामिल हो गया था. साल 2003 में इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन को अपदस्थ करने के लिए अमरीका के नेतृत्व में हुए हमले में ब्रिटेन का शामिल होना अंतिम उपाय नहीं था और यह दोषपूर्ण खुफिया जानकारी पर आधारित था. इराक युद्ध को लेकर हुई एक जांच की रिपोर्ट में यह बात कही गयी जिसमें जंग में शामिल होने के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के फैसले को दोषपूर्ण ठहराया गया है.

उल्लेखनीय है कि साल 2009 में शुरू की गयी आधिकारिक जांच के अध्यक्ष जॉन शिलकॉट ने कहा कि ब्रिटेन ने इराक पर हमले में शामिल होने से पहले सभी शांतिपूर्ण विकल्पों को नहीं तलाशा था. पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने निष्कर्ष निकाला है कि निरस्त्रीकरण के लिए शांतिपूर्ण विकल्प तलाशने से पहले ब्रिटेन ने इराक पर हमले में शामिल होने का फैसला किया. उस समय सैन्य कार्रवाई अंतिम उपाय नहीं थी.’’

उन्होंने यह भी कहा कि इराक के जनसंहार के हथियारों के बारे में फैसले जिस निश्चिंतता के साथ पेश किये गये, वे न्यायोचित नहीं थे और संघर्ष के बाद की योजना पूरी तरह अपर्याप्त थी.

इराक युद्ध पर उनकी 12 खंड, 26 लाख शब्दों की रिपोर्ट तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन द्वारा जांच का आदेश दिये जाने के सात साल बाद आई है.

इराक युद्ध में 2003 से 2009 के बीच करीब 180 ब्रिटिश सैनिक मारे गये थे. सद्दाम हुसैन को इराक के राष्ट्रपति पद से हटाने के लिए अमरीका के साथ जंग में शामिल होने के ब्रिटेन के फैसले के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री ब्लेयर पर शिलकॉट ने अपनी रिपोर्ट में सख्त फैसला दिया.

शिलकॉट की बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट के दायरे में 2001 से 2009 के बीच करीब एक दशक में ब्रिटिश सरकार के नीतिगत फैसलों को शामिल किया गया है. जॉन शिलकॉट समिति की रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश के इराक पर हमला करने के फैसले पर भी सवालिया निशान लग गया है. गौरतलब है कि इराक पर हमलें के पहले खुफिया जानकारियों के आधार पर दावा किया जा रहा था कि सद्दाम हुसैन के पास जनसंहारक रासायनिक हथियार है. जबकि इराक युद्ध के दौरान न तो सद्दाम हुसैन द्वारा इसका उपयोग किया गया और न ही उन्हें पद से हटाने के बाद किसी रासायनिक हथियार की बरामदगी हुई थी.

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