मप्र में शिशु मृत्युदर राष्ट्रीय औसत से अधिक

Wednesday, December 17, 2014

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बच्चा

भोपाल | एजेंसी: मध्य प्रदेश की महिला बाल विकास मंत्री माया सिंह ने कहा है कि शिशु मृत्युदर में कमी आई है, मगर यह अब भी राष्ट्रीय औसत दर से ज्यादा बनी हुई है. विभाग की एक वर्ष की उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए उन्होंने बुधवार को बताया कि वर्ष 2003 में शिशु मृत्युदर 86 प्रति हजार हुआ करती थी, जो अब 54 प्रति हजार रह गई है. वहीं राष्ट्रीय शिशु मृत्युदर 48 प्रति हजार है. इस स्थिति में सुधार आए, इसके लिए उनका विभाग विशेष प्रयास कर रहा है.

उन्होंने आगे बताया कि राज्य से कुपोषण खत्म करने के लिए सुपोषण अभियान चलाया जा रहा है. इसके तहत स्नेह शिविर और गृह भेंट कार्यक्रम चल रहे हैं. शिविरों में जहां माताओं को बच्चों को खिलाने-पिलाने के तरीकों के साथ पौष्टिक आहार के बारे में बताया जाता है, वहीं घर-घर जाकर इसका आंकलन भी किया जाता है. इसके अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं, इसके चलते कम वजन के पाए गए बच्चों में से 82 प्रतिशत की स्थिति में सुधार आया है.

उन्होंने आगे बताया कि बच्चियों, किशोरियों और महिलाओं की हालत में सुधार लाने और समाज में उनके प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए सुपोषण, आंगनवाड़ी चलो अभियान के साथ स्वागतम लक्ष्मी योजना लागू की गई है. इन योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है.

लाडली लक्ष्मी योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस योजना से अब तक 18 लाख 62 हजार बालिकाएं लाभान्वित हुई हैं. इस वर्ष लाभ पाने वाली बालिकाओं की संख्या एक लाख 36 हजार है. इस योजना को सरलीकृत और हितग्राही का मित्रवत बनाया गया है.

समाज में व्याप्त कुरीतियों को मिटाने के लिए विभाग द्वारा शुरू लाडो अभियान का ब्यौरा देते हुए उन्होंने बताया कि इस वर्ष 51 हजार 635 बाल विवाह रोके गए हैं. आयोजन स्थल पर पहुंचकर 661 बाल विवाहों को रोका गया, जबकि 29 प्रकरणों में पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई. इसके साथ ही बाल विवाह के कानून से अवगत कराने कार्यशालाएं हुईं और कोर ग्रुप गठित किए गए हैं.

माया सिंह ने बताया कि महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए 20 जिलों में शौर्या दल का गठन किया गया है. यह दल सात हजार 200 गांवों और 305 वाडरें में गठित किया गया है. ये दल महिलाओं में जागरूकता ला रहे हैं.

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