छत्तीसगढ़ के शहरों में बढ़ी असमानता

Wednesday, November 6, 2013

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अमीर गरीब की खाई

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के शहरों में आपसी असमानता बढ़ी है. शहरों में यह आर्थिक असमानता राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है. इस बात को भारत सरकार के सांखियकी तथा कार्यक्रम मंत्रालय ने माना है.

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में बताया गया है कि गिनी गुणांक के अनुसार राष्ट्रीय असमानता शहरों में 0.37 है जबकि यह छत्तीसगढ़ में 0.39 है. छत्तीसगढ़ की तुलना में हरियाणा, पश्चिम बंगाल तथा दिल्ली के शहरी क्षेत्रों में आर्थिक असमानता कम है.

सात राज्यों के लिये दिये आकड़ो में छत्तीसगढ़ का स्थान एकदम बीच में चौथा है. हरियाणा के शहरों का गिनी गुणांक 0.38, पश्चिम बंगाल का 0.38 तथा दिल्ली का 0.37 अंक है.

गिनी गुणांक वह मानक है जिसके आधार पर आर्थिक असमानता की तुलना की जाती है. शून्य का अर्थ है कि वहां के बाशिंदों के बीच में आर्थिक असमानता नही है तथा एक संख्या का मतलब यह होता है कि वहां के बाशिंदों के बीच सबसे ज्यादा आर्थिक असमानता है.

गिनी गुणांक केवल आर्थिक असमानता को या बराबरी को दर्शाता है न की सकल घरेलू उत्पादन को. यह जानकारी भारत सरकार के मंत्रालय द्वारा बिज़नेस स्टैंडर्ड को दी गई है.

वैसे यदि आकड़ो में न जाकर वास्तविकता को देखें तो साफ दिखता है छत्तीसगढ़ के शहरों में गरीबों की संख्या में वृद्धि हुई है. कुछ लोग बेतहाशा ढ़ंग से अमीर हो गये हैं जबकि अधिकांश जनसंख्या दो रुपये किलो चावल पर गुजारा करती है.

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