अमरीका में बढ़ते भारतवंशी चिकित्सक

Sunday, July 13, 2014

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डॉ. सीमा जैन

वाशिंगटन | एजेंसी: अमरीका में करीब एक लाख भारतवंशी चिकित्सकों का एक संगठन अपने देश के प्रति फर्ज अदा करने की राह तलाशने के काम में युवाओं को भी अपने साथ जोड़ रहा है. यह अमरीका के सबसे बड़े सामुदायिक पेशेवर संगठनों में से एक है.

डॉ.सीमा जैन अगले वर्ष जून महीने में अमरीकन एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन ऑरिजिन, एएपीआई के अध्यक्ष का पद संभालने वाली हैं, और वह मौजूदा भारतीय परियोजना जारी रखना चाहती है. यह संस्था भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ काम करती है.

सीमा ने बताया, “हमारे पास भारतीय गांवों में सेवा पहुंचाने के लिए प्रायोगिक परियोजना एक सेवक परियोजना है, पूरे भारत में कुछ आर्थिक परियोजना और 17 परोपकारी चिकित्सा केंद्र हैं.”

एक परियोजना की शुरुआत इस वर्ष भारत में होगी, जो सड़क दुर्घटना में लगे आघात विशेषकर मानसिक आघात से निबटेगा.

सीमा संगठन का विस्तार कर इसे अमरीकियों के बीच मुख्यधारा में ले जाना चाहती हैं और अपनी गतिविधियों में शिक्षकों, युवा चिकित्सकों, छात्रों को शामिल करना चाहती हैं.

उन्होंने कहा, “हम न्यूजलेटर, ट्विटर, फेसबुक के जरिए एएपीआई को अधिक डिजीटल बनाना चाहते हैं. एएपीआई सोशल मीडिया से जैसे जुड़ रहा है शिक्षक भी इसमें शामिल होना चाहते हैं.”

सीमा ने कहा, “यह सामुदायिक क्षेत्रीय संगठन जैसा नहीं होना चाहिए. इसे मुख्यधारा में आना चाहिए. यही मेरा लक्ष्य है.”

उनका दूसरा लक्ष्य इसमें शिक्षकों को शामिल करना है. सीमा ने कहा, “हम शिक्षकों को जोड़ने के लिए चिकित्सा विज्ञान से जुड़े सम्मेलन का आयोजन और लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार की शुरुआत करना चाहते हैं.”

कोलंबस स्लीप कंसल्टेंट्स के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौतम समाद्दर नए सचिव के रूप में इसे मुख्यधारा में ले जाने और भारतवंशी युवा चिकित्सकों को शामिल करने को मुख्य चुनौती मान रहे हैं.

उन्होंने कहा, “1982 में इस संस्था की शुरुआत अस्पतालों में भारतीय चिकित्सकों के साथ होने वाले भेदभाव की चुनौतियों को देखते हुए की गई थी. अब जब हमारे बच्चे मेडिकल कॉलेज में पढ़ते हैं, हमने अमरीकी चिकित्सा व्यवस्था में अपनी दखल बनाई है.”

वह कहते हैं कि अभी भी एएपीआई के सामने मुख्य चुनौती भारतवंशी युवा चिकित्सकों को इसमें शामिल करने की है.

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