‘भारतीय अर्थव्यवस्था उत्थान की ओर’

Friday, April 17, 2015

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मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: मूडीज ने मान लिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था विकास कर रही है तथा इससे घरेलू मांग बढ़ेगी. देश के आर्थिक परिदृश्य को स्थिर से बढ़ाकर सकारात्मक करने के करीब एक सप्ताह बाद वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने शुक्रवार को कहा कि भारत की विकास दर 2015 में 7.5 फीसदी रह सकती है. मूडीज एनालिटिक्स के सहायक अर्थशास्त्री फराज सैयद ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था चक्रीय उत्थान की ओर है. भावी परिदृश्य से पता चलता है कि घरेलू मांग बढ़ेगी.”

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि महंगाई दर कम होने के कारण भारतीय रिजर्व बैंक ने 2015 के शुरू में मुख्य दर में 50 आधार अंकों की कटौती कर दी है, जिससे निजी क्षेत्र पर दबाव घटा है.

सैयद ने कहा, “निम्न दर और सरकार के अवसंरचना तथा विनिवेश संबंधी कार्यक्रमों से घरेलू बाजार पर आधारित उद्योगों में विकास दर्ज हो सकता है.”

रिजर्व बैंक ने पहले 15 जनवरी और फिर चार मार्च को रेपो दर में 25 आधार अंकों की दो बार कटौती की है.

रेपो दर वह दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक रिजर्व बैंक से छोटी अवधि के लिए कर्ज लेते हैं.

रिजर्व बैंक ने सात अप्रैल की मौद्रिक समीक्षा में दरों को जस का तस छोड़ दिया.

रिजर्व बैंक ने कहा कि कीमतों में और गिरावट दर्ज किए जाने और वाणिज्यिक बैंकों द्वारा आवास, वाहन और कॉरपोरेट ऋण की दरों में कटौती करने के बाद मुख्य दरों में और कटौती की जाएगी.

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि मानसून के सामान्य रहने पर मौजूदा कारोबारी साल में विकास दर 7.8 फीसदी रह सकती है. उन्होंने हालांकि मानसून के सामान्य रहने को लेकर चिंता भी जताई. उन्होंने साथ ही साल के आखिर तक महंगाई दर के 5.8 फीसदी तक रहने का अनुमान जताया है.

सैयद ने कहा कि रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि मौजूदा कारोबारी साल की प्रथम तिमाही में विकास दर साल-दर-साल आधार पर 7.3 फीसदी रह सकती है.

करीब एक सप्ताह पहले मूडीज ने भारत के आर्थिक परिदृश्य को स्थिर से सुधार कर सकारात्मक कर दिया था. एक अन्य रेटिंग एजेंसी फिच ने उसी दौरान देश के स्थिर परिदृश्य को बरकरार रखा था.

एशियाई विकास बैंक ने 2015-16 में देश की विकास दर 7.8 फीसदी और 2016-17 में 8.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.

14 अप्रैल को विश्व बैंक ने कहा था कि आगामी कारोबारी साल में भारत की विकास दर बढ़कर आठ फीसदी रह सकती है.

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