घरेलू बाजार आधारित विकास में भारत आगे

Sunday, March 30, 2014

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नई दिल्ली | एजेंसी: भारत ने अपने घरेलू बाजार को आर्थिक विकास का इंजन बनाया है. यह नुस्खा वैश्विक अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए अपनाने की सलाह दी जाती रही है, जो 2008 से वित्तीय संकट से त्रस्त है.

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) के महासचिव मुखिसा किटुई ने आईएएनएस से कहा, “भारत उन अग्रणी देशों में शामिल है, जिन्होंने सतत विकास के लिए घरेलू बाजार के योगदान को पहचाना है.”

यूएनसीटीएडी की स्थापना 1964 में विकासशील देशों के एक मंच के रूप में हुई थी, जहां आर्थिक विकास से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा सके. संगठन का मकसद विकासशील देशों के व्यापार, निवेश और विकास के अवसरों को बढ़ाना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में समानता के साथ उनकी भागीदारी में मदद करना है.

उन्होंने कहा, “भारत का सरकारी निवेश और वेतन नीतियों का निर्माण देश के मध्यवर्ग के विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया था, जो सलाह वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासकर वैश्विक दक्षिण के मंदी से उबरने के लिए दी जाती रही है.”

केन्याई नागरिक किटुई ने कहा कि घरेलू बाजार के विकास के मामले में भारत की उपलब्धि चीन से बेहतर है.

उन्होंने कहा, “अधिक वेतन सिर्फ एक खर्च नहीं है, बल्कि उपभोक्ता के विस्तार में एक निवेश भी है. भारत में सकल घरेलू उत्पादन में घरेलू खपत का योगदान करीब 70 फीसदी है, जबकि चीन में यह 50 फीसदी है.”

यूएनसीटीएडी के महासचिव ने कहा कि भले ही वैश्विक संकट के प्रभाव को रोक पाने में अकेले भारत की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन भारत काफी कुछ दे सकता है और पिछड़े देश मिलकर ब्याज दरों को स्थिर रख सकते हैं.

उन्होंने कहा, “हम दक्षिण मूल्य श्रंखला को पूरा कर सकते हैं, यदि पिछड़े देशों में मध्यवर्ग में समुचित रूप से निवेश करें.”

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