भ्रष्ट्राचार पर कुछ नही कहा गया

Saturday, August 16, 2014

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नरेन्द्र मोदी-प्रधानमंत्री

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्ट्राचार पर कुछ नहीं कहा है. गौरतलब है कि पिछले साल 15 अगस्त 2013 के दिन गुजरात के भुज के लालन कॉलेज से नरेन्द्र मोदी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर तंज कसते हुए कहा था कि “एक वक्त था जब देश में भ्रष्टाचार पर सीरियल बनते थे, फिर मामा और भांजे पर सीरियल बना. लेकिन अब जमाना सास, दामाद और बेटे का है.”

सबसे दिलचस्प बात है कि मोदी ने अपने चुनाव में देश में फैले भ्रष्ट्राचार को मुख्य मद्दा बना लिया था. ऐसे में उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद 15 अगस्त के दिन देश की जनता को उनके संबोधन में भ्रष्ट्राचार का उल्लेख न होना क्या इस बात का सबूत माना जाये कि प्रधानमंत्री मोदी ने इतने कम समय में ही देश से भ्रष्ट्राचार का खात्मा कर दिया है.

शनिवार को 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से पहली बार देश को संबोधित किया जिसमें उन्होंने कहा, “भाइयो-बहनो, मैं मेरी सरकार के साथियों को भी कहता हूं, अगर आप 12 घंटे काम करोगे, तो मैं 13 घंटे करूंगा. अगर आप 14 घंटे कर्म करोगे, तो मैं 15 घंटे करूंगा. क्यों? क्योंकि मैं प्रधान मंत्री नहीं, प्रधान सेवक के रूप में आपके बीच आया हूं. मैं शासक के रूप में नहीं, सेवक के रूप में सरकार लेकर आया हूं.” प्रधानमंत्री में सेवक का भाव हो सकता है लेकिन इसकी उम्मीद कार्यपालिका के सभी लोगों से नहीं की जा सकती है.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में महिलाओं पर , सांप्रदायिकता पर, कन्या भ्रूण हत्या की समस्या पर , पीपीपी मॉडल पर, गरीबों के बैंक एकाउंट न होने पर, विकास के लिये ‘स्किल इंडिया’ पर, सांसद निधि से स्कूलों में शौचालय बनाने पर, देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर, ई गवर्नेंस-मोबाइल गवर्नेंस पर, संसद ग्राम योजना पर, योजना आयोग पर, ग़रीबी उन्मूलन पर, विदेश नीति पर तथा पर्यटन पर विस्तार से सरकार की योजनाओं को जनता के सामने रखा. हैरत की बात है कि इसमें भ्रष्ट्राचार रूपी बुराई से लड़ने के लिये कोई घोषणा नहीं की गई.

भ्रष्ट्राचार कोई भूत नहीं है जो नरेन्द्र भाई मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही देश छोड़कर भाग गया है. समाज में, सरकारी काम-काज में भ्रष्ट्राचार आज भी व्याप्त है. भ्रष्ट्राचार से हमारा तात्पर्य आर्थिक भ्रष्ट्राचार से है जिसे बोलचाल की भाषा में घूसखोरी भी कहा जाता है.

देश की जनता को लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के काल में हुए भ्रष्ट्राचार को गिनवाने वाले तथा उस पर जमकर प्रहार करने वाले मोदी से उम्मीद थी कि उनके प्रधानमंत्री के रूप में 15 अगस्त के भाषण में इससे निपटने और देश तथा समाज से इसका खात्मा करने के लिये योजनाएं-घोषणाएं पेश की जायेगी परन्तु ऐसा नहीं किया गया.

कम से कम भ्रष्ट्राचार के खिलाफ किसी जंग का भी ऐलान नहीं किया गया न ही सरकार की उन योजनाओं के बारे में बताया गया जिनसे भ्रष्ट्राचार दूर होने जा रहा है. यह सच है कि नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते उन पर भ्रष्ट्राचार का कोई आरोप नहीं लगा परन्तु इसका अर्थ यह नहीं होता कि उनके प्रधानमंत्री बनने से देश से भ्रष्ट्राचार स्वंयमेय खत्म हो जायेगा. भ्रष्ट्राचार के खिलाफ जंग की जरूरत इस देश को आज भी है.

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