60 हज़ार में बिकी भिलाई की ललिता

Friday, November 20, 2015

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अलवर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के भिलाई की ललिता 60 हज़ार रुपये में राजस्थान में बिक गई. गुरुवार को उसने जब पुलिस को अपनी दास्तान सुनाई तो पुलिस वाले भी चौंक गये. फिलहाल अलवर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. नगर थाना प्रभारी रामनिवास मीणा का कहना है कि उन्होंने इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस से भी संपर्क साधा है.

पुलिस के अनुसार भिलाई के खुर्सीपार इलाके की 24 साल की ललिता (बदला हुआ नाम) 2 नवंबर को नंदू नामक एक युवक के बहकावे में आ कर उसके साथ बाइक में बैठ कर नागपुर जा पहुंची. नागपुर के मांडावली इलाके में अपने एक दोस्त विनोद के यहां छोड़ कर चला गया. इसके एक सप्ताह बाद नंदू वापस लौटा और ललिता को अपने साथ एक ट्रक में लेकर इंदौर आ गया. उसके साथ विनोद और उसकी पत्नी सिंधु भी थे.

बाद में नंदू ने विनोद से 30 हज़ार रुपये लिये और ललिता को छोड़ कर वापस चला गया. इंदौर से विनोद और उसकी पत्नी ललिता को 14 नवम्बर को ट्रेन से लेकर गंगापुरसिटी से भरतपुर होते हुये अलवर आ गये. यहां विनोद का एक दोस्त राहुल भी उनके साथ हो लिया.

आरोप है कि विनोद और राहुल ने सैमला कला इलाके के निवासी असरु मेव से 60 हज़ार रुपये लिये और फिर ललिता को उसके हवाले कर दिया.

असरु मेव पीड़िता ललिता को कहीं और बेचने की तैयारी में था, इस बीच गुरुवार की रात ललिता सैमला कला इलाके से भाग कर मोरारका टोल प्लाजा पहुंची. अलवर रोड के इस टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने तुरंत पुलिस को खबर दी, जिसके बाद मौके पर पहुंच कर पुलिस, ललिता को नगर थाना ले कर आई.

पुलिस ने इस आशंका से इंकार नहीं किया है कि इस पूरे मामले में कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है, जो देश के अलग-अलग इलाकों से लाकर लड़कियों को राजस्थान में बेचता है. पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये तलाशी अभियान चलाया है.

भयावह हैं छत्तीसगढ़ के आंकड़े
सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ से पिछले पांच सालों में कुल 14,118 बच्चे तथा 19,670 लड़कियां तथा महिलायें लापता हुई हैं. ये वो आंकड़े हैं, जो पुलिस रिपोर्ट में दर्ज हैं. वरना आदिवासी इलाकों में तो अधिकांश मामलों में पुलिस रिपोर्ट ही नहीं दर्ज करती. यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिलों में बच्चों तथा लड़कियों के लापता होने की संख्या तथा प्रतिशत रायपुर एवं बिलासपुर की तुलना में काफी कम है.

पिछले पांच सालों में राज्य से जितने बच्चे लापता हुए हैं, उनमें सबसे ज्यादा रायपुर से 16.7 फीसदी गायब हुये हैं. इसी तरह से लड़कियों तथा महिलाओं की पिछले पांच सालों में राज्य से जितनी गुमशुदगी हुई है, उसमें 16.9 फीसदी रायपुर से हैं.

रायपुर जिले से पिछले 5 सालों में 2358 बच्चे तथा 3329 लड़कियां तथा महिलायें लापता हुई हैं. राजधानी रायपुर के बाद लापता बच्चे, लड़किया तथा महिलायों की संख्या न्यायधानी बिलासपुर में दूसरे नंबर पर है. बिलासपुर जिले से पिछले पांच सालों में 1446 बच्चे तथा 1498 लड़किया तथा महिलायें गायब हुई हैं. राज्य से कुल जितने बच्चे पिछले पांच सालों में लापता हुये हैं, उनमें बिलासपुर जिले से 10.2 फीसदी तथा लड़कियां तथा महिलायें 7.6 फीसदी लापता हुई हैं.

सरकारी आकड़ों के अनुसार जशपुर से पिछले पांच सालों में 533 बच्चे, जगदलपुर से 365, दंतेवाड़ा से 82, कांकेर से 241, कोण्डागांव से 99, बीजापुर से 59, नारायणपुर से 39 तथा सुकमा से 38 बच्चों के लापता होने की खबर है.

यदि इन आकड़ों को छत्तीसगढ़ से कुल लापता बच्चों के प्रतिशत के रूप में देखा जाये तो जशपुर से 3.7 फीसदी, जगदलपुर से 2.5 फीसदी, दंतेवाड़ा से 0.5 फीसदी, कांकेर से 1.7 फीसदी, कोण्डागांव से 0.7 फीसदी, बीजापुर से 0.4 फीसदी, नारायणपुर से 0.2 फीसदी तथा सुकमा से 0.2 फीसदी बच्चों के लापता होने की खबर है.

जहां तक लड़कियों तथा महिलाओं के लापता होने की संख्या है, जशपुर से 318, जगदलपुर से 477, दंतेवाड़ा से 133, कांकेर से 506, कोण्डागांव से 187, बीजापुर से 53, नारायणपुर से 43 तथा सुकमा से 12 लड़किया तथा महिलायें गायब हुई हैं.

इन आकड़ों को भी यदि राज्य के कुल लापता लड़कियों तथा महिलाओं की संख्या से तुलना करें तो ज्ञात होता है कि जशपुर से 1.6, जगदलपुर से 2.4, दंतेवाड़ा से 0.6, कांकेर से 2.5, कोण्डागांव से 0.9, बीजापुर से 0.2, नारायणपुर से 0.2 तथा सुकमा से 0.06 फीसदी लड़कियां तथा महिलायें आज तक लापता हैं.

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