हौसले ने दिलाई मंजिल

Thursday, August 1, 2013

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उड़ती चिड़िया

कोरबा । एजेंसी: सपने उनके पूरे होते हैं जिनके कदमों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है. कुछ इन्हीं पक्तियों को सही साबित करता है दोनों पैरों से नि:शक्त ग्रामीण युवक हनुमान सिंह.

आज वह अपने जीवन की नई दिशा की ओर चल पड़ा है. दोनों पैरों से नि:शक्त होने के साथ ही गांव में हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं होने के कारण हनुमान को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा.

गांव में कक्षा दसवीं तक की पढ़ाई करने के बाद हनुमान को 7 से 8 साल शिक्षा से वंचित होना पड़ा. 12वीं नहीं पढ़ पाने का मलाल उसे हर पल सताता रहा. आखिरकार 8 साल बाद 12वीं कक्षा की परीक्षा में स्वतंत्र रूप से शामिल हुआ और 73 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा पास की. हनुमान की मेहनत व्यर्थ नहीं गई.

राज्य सरकार द्वारा युवाओं के लिए शुरू की गई नौकरी की मुहिम में गरीब परिवार के ग्रामीण बेरोजगार और दोनों पैरों से नि:शक्त को शिक्षाकर्मी वर्ग 3 में नियुक्ति मिली.

कोरबा विकासखंड के अजगर बहार पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम नर्बदा के युवक हनुमान सिंह उम्र 27 वर्ष पिता श्री चमरासिंह की नियुक्ति हाल ही में शिक्षाकर्मी वर्ग तीन के रूप में प्राथमिक शाला अजगर बहार में हुई है. बचपन से ही दोनों पैरों से नि:शक्त हनुमान सिंह के जीवन की नई पारी की शुरुआत हो चुकी है. शासकीय सेवा में आने के बाद वह बहुत ही राहत महसूस कर रहा है.

हनुमान ने बताया कि बालको में एक शिक्षक के आवास में रहकर उसने 11वीं की पढ़ाई पूरी की, लेकिन शिक्षक का तबादला होने के बाद उसे अपने घर लौटना पड़ा और गांव में ही 8 साल बिताना पड़ा. हनुमान ने बताया कि जब उसे अहसास हुआ कि 12वीं में अच्छे नंबरों से परीक्षा पास करने वालों को छत्तीसगढ़ सरकार नौकरी दे रही है तो उसने 12वीं की पढ़ाई करने का मन बनाया. ध्यान लगाकर गंभीरता से पढ़ाई की और वर्ष 2012-13 में स्वतंत्र छात्र के रूप में परीक्षा दी.

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