गौरीशंकर अग्रवाल की मुश्किल होगी कम?

Saturday, July 19, 2014

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गौरीशंकर अग्रवाल

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल की मुश्किलें कम होंगी ? सरकारी ज़मीन पर अवैध तरीके से मंदिर, 19 दुकानें, सत्संग भवन बनाने और बगीचा बनाने के मामले में कांग्रेस ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संकट ये है कि इस मामले में सरकार पहले ही गौरीशंकर अग्रवाल को गलत ठहरा चुकी है लेकिन भारतीय जनता पार्टी इस मामले में गौरीशंकर अग्रवाल को गलत मानते हुये भी उनकी नीयत और मंशा की बात कहते हुये उन्हें महान बता रही है.

अब कांग्रेस ने इस मुद्दे पर गौरीशंकर अग्रवाल को घेरना शुरु किया है. शनिवार को कांग्रेस पार्टी ने रायपुर में गौरीशंकर अग्रवाल का पुतला फूंका और प्रदर्शन किया. इससे एक दिन पहले कांग्रेस के नेताओं ने गौरीशंकर अग्रवाल को इसी मुद्दे पर घेरते हुये पत्रकार वार्ता में कई गंभीर आरोप लगाये थे.

गौरतलब है कि गौरीशंकर अग्रवाल हाल ही में अपने बंगले में 48 एयर कंडिशनर लगाए जाने को लेकर विवादों में आये थे. अब सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा का मुद्दा राज्य भर में गरमाया हुआ है. कांग्रेस का कहना है कि इस मामले में विधानसभा में विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है. इसके उलट गौरीशंकर अग्रवाल केवल यह कहते हुये पूरे मामले में अपना बचाव कर रहे हैं कि कांग्रेस को जनता से जुड़े मुद्दे पर ध्यान लगाना चाहिये.

इधर भाजपा ने सफाई दी है कि गौरीशंकर अग्रवाल से गलती हुई है लेकिन उनकी मंशा और नीयत अच्छी थी. भाजपा के प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने और संजय श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार ने पूरी संपत्ति को राजसात कर लिया है, इसलिये अब इस पर बहस का कोई अर्थ नहीं है.

इन दोनों प्रवक्ताओं का कहना था कि गौरीशंकर अग्रवाल ने उस ज़मीन पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिया और जब सरकार ने उस ज़मीन को राजसात कर लिया तो भी गौरीशंकर अग्राल ने सरकार के निर्णय को चुनौती नहीं दे कर अक महान भावना का परिचय दिया है.

असल में जिस सरकारी ज़मीन के विवाद में विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल उलझे हैं, उस ज़मीन को लेकर 2012 में लोक आयोग को शिकायत की गई थी कि .404 हेक्टेयर सरकारी ज़मीन पर कब्जा कर के उस पर कई निर्माण किये गये हैं. इस मामले में कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार ने जांच की और इसी साल 7 जून को सरकार को रिपोर्ट दी थी. जिसके बाद कलेक्टर ने पूरी संपत्ति को राजसात करने के निर्देश दिये थे. हालांकि आज तक कलेक्टर उसे राजसात नहीं कर पाये हैं.

कांग्रेस का कहना है कि जब पूरे मामले की जांच के बाद सरकार ने गौरीशंकर अग्रवाल और उनके परिजनों को दोषी पाया है तो वह उन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है. लेकिन भाजपा ने जिस अंदाज में गौरीशंकर अग्रवाल को क्लिनचिट दिया है, उससे यह साफ हो गया है कि सरकार कम से कम गौरीशंकर अग्रवाल के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई के मूड में नहीं है. ऐसे में कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर कितने दिन और किस अंदाज में विरोध जारी रखेगी, इस पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं.

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