भविष्य के फैशन डिजाइनर सुशांत?

Monday, March 30, 2015

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'डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी'

नई दिल्ली | मनोरंजन डेस्क: यदि सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी’ सफल नहीं होती है तो उनके सामने फैशन डिजाइनर बनने का रास्ता खुला हुआ है. सुशांत ने इसकी शुरुआत भी कर दी है. सुशांत ने अपने कपड़ों को ‘नोयर 43′ के नाम से लांच किया है. वैसे उनका उद्देश्य इस फैशन संग्रह को लांच करके फिल्म ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी’ को सफल बनाना ही है. इसे कहते हैं ‘सांप भी मर गया तथा लाठी भी नहीं टूटी.’ ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी!’ के निर्देशक दिबाकर बनर्जी और अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने पिछले सप्ताह अमेजन इंडिया फैशन वीक में ‘नोयर 43′ नाम से एक परिधान संग्रह लांच किया. यह उनकी इस आगामी फिल्म से प्रेरित है. सुशांत ने कहा है कि उन्हें भविष्य में अपनी फैशन श्रंखला शुरू करने में कोई आपत्ति नहीं होगी.

सुशांत ने दिल्ली के प्रगति मैदान में परिधान संग्रह का लांच किया. इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में आप अपनी फैशन श्रृंखला शुरू करना चाहेंगे? तो सुशांत ने जवाब में कहा, “मैंने फिलहाल इस बारे में सोचा नहीं है. लेकिन मैं भविष्य में ऐसा करना चाहूंगा. क्यों नहीं?”

अपने स्वयं के फैशन स्टाइल के बारे में आप क्या कहते हैं?

सुशांत ने कहा, “मुझे फैशन की समझ है, लेकिन मुझे नहीं मालूम कि इसका क्या करूं. मैं आरामदेह परिधानों को प्राथमिकता देता हूं, लेकिन ये आरामदायक व कैजुअल होने चाहिए.”

यह परिधान संग्रह सिर्फ वेबसाइट ‘अमेजन डॉट इन’ पर उपलब्ध होगा.

‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी!’ वर्ष 1943 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान के कोलकाता की पृष्ठभूमि लिए हुए है.

नोयर 43 परिधान संग्रह के पुरुष परिधान सैन्य वर्दियों और द्वितीय विश्वयुद्ध के कोलकाता से प्रेरित हैं. इस परिधान संग्रह में काले और गहरे रंगों का वर्चस्व है.

यह परिधान संग्रह ‘धोती’ की एक नई व्याख्या करता है, जबकि डिजिटली प्रिंटेड शर्ट और टीशर्ट फिल्म में चित्रित मूड को दर्शाती हैं.

वहीं परिधान संग्रह में मौजूद महिलाओं के लिबास 1940 के दशक के ग्लैमर, मिनी स्कर्ट, पलज्जोस और पीटर पैन कॉलर वाले ब्लाउज को दर्शाते हैं.

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