कौंवो से 30 साल पुरानी दोस्ती

Thursday, September 26, 2013

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कौंवा

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के शहरों से एक ओर जहां कौवे लगातार गायब होते जा रहे हैं वहीं धमतरी जिले में पिछले 30 वर्षो से एक इंसान और कौवों की दोस्ती देखते ही बनती है.

शहर के बीचोंबीच प्रकाश आडवाणी के घर के मुंडेर पर सैकड़ों की संख्या में कौवों की जमात रोजाना दिख जाती है. सुबह होते ही यहां कांव-कांव की आवाज से पूरा इलाका गुंजायमान रहता है.

पितृ पक्ष में आम तौर पर लोग कौवे को भोजन कराने के लिए खोजते हैं और वह खोजे नहीं मिलता. ऐसे में इनकी मुंडेर पर सैकड़ों कौवों की उपस्थिति आज लोगों के लिए सुखद है. जब पितृ पक्ष चल रहा हो तो इनकी आवभगत भी बढ़ जाती है.

राजधानी रायपुर से 60 किलोमीटर दूर स्थित धमतरी जिला मुख्यालय के ब्राम्हणपारा सदर लाइन निवासी प्रकाश आडवाणी की कौवों से दोस्ती दाना खिलाने से शुरू हुई है. लगभग 20 साल की उम्र से वह रोजाना सुबह छह बजे अपने मुंडेर पर ही इनको दाना खिला रहे हैं.

कौवों के कांव-कांव की आवाज शहर के इस इलाके में सुबह पांच बजे से ही गूंजने लगती है. दाना खाने के इंतजार में ये प्रकाश के घर के आसपास इंतजार करते हैं. जैसे ही वह सीढ़ियों से छत पर पहुंचते हैं कांव-कांव का तेज शोर गूंजने लगता है. ये तब तक वापस नहीं उड़ते जब तक प्रकाश छत से नीचे न उतर जाएं. प्रकाश की यह रोजाना की आदत है.

सैकड़ों की संख्या में यहां एकत्रित कौवों को देखने के लिए जब वीएनएस के संवाददाता पहुंचे तो उन्होंने सुबह मुंडेर पर सैंकड़ों की संख्या में कौंवों को आते देखा. प्रकाश ने वीएनएस को बताया कि कौवे आज भी गायब नहीं हुए हैं सिर्फ उन्हें प्रेमपूर्वक बुलाने वाला चाहिए. कौवे आज भी पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं.

उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता भी कौवों को रोजाना दाना डालते थे, माता-पिता से ही उन्हें यह प्रेरणा मिली. वह बताते हैं कि पहले उसके हाथ का दाना चुगने 8-10 कौवे ही आते थे. अब 300 से अधिक कौवे रोजाना आते हैं.

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