वित्त आयोग की बैठक में छत्तीसगढ़ की तारीफ

Thursday, June 12, 2014

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रमन सिंह

रायपुर | संवाददाता: देश के 14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष वाय.व्ही. रेड्डी ने आज यहां मंत्रालय में आयोजित बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह देश के सर्वाधिक सफल मुख्यमंत्रियों में से हैं. उनके नेतृत्व में राज्य ने वित्तीय क्षेत्र में सर्वाधिक प्रभावी प्रदर्शन किया है. श्री रेड्डी ने कहा कि अनेक दिक्कतों और सीमित संसाधनों के बावजूद छत्तीसगढ़ ने सामाजिक विकास और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य किया है. आयोग के अन्य सदस्यों ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए. रेड्डी और आयोग के अन्य सदस्यों प्रो. अभिजीत सेन,सुषमा नाथ, डॉ. एम. गोविन्द राव तथा डॉ. सुदीप्तो मुण्डले और सचिव ए.एन. झा ने बैठक में मुख्यमंत्री के साथ छत्तीसगढ़ के विकास के विभिन्न क्षेत्रों के लिए वित्तीय जरूरतों और प्रस्तावों के बारे में विचार-विमर्श किया.

आयोग के अध्यक्ष ने राज्य सरकार के प्रस्तुतिकरण की भी प्रशंसा की. इस मौके पर डॉ. रमन सिंह ने वित्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का स्वागत करते हुए विकास के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं के तहत प्रदेश सरकार की उपलब्धियों और भावी कार्य-योजनाओं तथा आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला.

मुख्यमंत्री ने वित्त आयोग के समक्ष राज्य सरकार की ओर से लगभग 34 हजार करोड़ रूपए की विशेष अनुदान मांगों का प्रस्ताव रखा. उन्होंने वित्त आयोग से कहा कि केन्द्रीय कर राजस्व में से वर्तमान में छत्तीसगढ़ को सिर्फ 32 प्रतिशत हिस्सा मिलता है, जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाना चाहिए, ताकि केन्द्र और राज्यों के बीच असंतुलन दूर हो सके. मुख्यमंत्री ने वित्त आयोग के समक्ष यह भी मांग रखी कि वर्तमान में केन्द्र और राज्यों के बीच केन्द्रीय कर राजस्व के बंटवारे का आधार वर्ष 1971 की जनगणना को माना जाता है, जिसे वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार निर्धारित करना चाहिए.

इसके अलावा वित्त आयोग को यह भी सुझाव दिया गया कि पंचायतों और नगरीय निकायों के लिए वर्तमान में केन्द्रीय कर राजस्व का हिस्सा सिर्फ ढाई प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी बल दिया कि केन्द्रीय राजस्व के बंटवारे के फार्मूले में प्रति व्यक्ति आय के स्थान पर प्रति व्यक्ति व्यय को आधार बनाया जाए, क्योंकि राज्य में अर्जित आय का बड़ा हिस्सा राज्य के बाहर चला जाता है. मुख्यमंत्री ने यह भी मांग रखी की वन क्षेत्रों और नक्सल समस्या के कारण विकास कार्यां की लागत बढ़ जाती है. इसलिए कर राजस्व के बंटवारें में वन क्षेत्रफल को आधार माना जाए.

डॉ. रमन सिंह ने आयोग के अन्य संदर्भ बिन्दुओं के बारे में कहा कि राज्य के कम ऋणभार और वित्तीय जरूरतों को देखते हुए प्रदेश को अधिक ऋण लेने की स्वतंत्रता दी जाए. राज्य द्वारा पंचायत और नगरीय निकायों को सौंपी गई जिम्मेदारियों को देखते हुए इन्हें देने वाले अनुदान की राशि को केन्द्रीय कर राजस्व के ढाई प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया जाना चाहिए. अधिसूचित क्षेत्रों में पिछड़ेपन को दूर करने के लिए वहां की ग्राम पंचायतों के लिए एक प्रतिशत राजस्व विशेष रूप से सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल समस्या भी अपने आप में एक आपदा है, अतः इससे निपटने के लिए राष्ट्रीय और राज्य की आपदा निधियों से नक्सल आपदा को ध्यान में रखकर भी केन्द्र से सहायता मिलनी चाहिए.मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आयोग के अध्यक्ष और उनके साथ आए सदस्यों के साथ बैठक में हुई चर्चा को अत्यंत सकारात्मक बताया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया.

डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने बजट का काफी बड़ा हिस्सा सामाजिक क्षेत्र के लिए निर्धारित किया है. उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना के समय प्रदेश का कुल बजट लगभग साढ़े आठ हजार करोड़ के आस-पास था, जो बढ़कर इस वित्तीय वर्ष 2014-15 में बढ़कर 54 हजार करोड़ रूपए से भी ज्यादा हो गया है. छत्तीसगढ़ देश ऐसा पहला राज्य है, जो केन्द्र द्वारा घोषित समर्थन मूल्य नीति के अनुरूप किसानों का धान स्वयं के बलबूते खरीद रहा है. हमने अपने किसानों को वर्ष 2012 की धान खरीदी पर 270 रूपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया है और इस बार उन्हें 300 रूपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया जाएगा. किसानों को सिंचाई के लिए सालाना साढ़े सात हजार यूनिट बिजली निःशुल्क दी जा रही है. यह देश का पहला राज्य है, जिसने अपने नौजवानों को उनके मनपसन्द व्यवसायों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अधिकार दिया है और इसके लिए कानून बनाकर उन्हें कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण का अधिकार दिया गया है. प्रदेश के सभी 27 जिलों में युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण देने आजीविका कॉलेज यानी लाइवलीहुड कॉलेज खोले जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर के विस्तार के रूप में लगभग आठ हजार हेक्टेयर में नया रायपुर शहर बसाया जा रहा है, जहां मंत्रालय और विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष कार्यालय शुरू हो चुके हैं.वित्त आयोग के अध्यक्ष रेड्डी और सदस्यों के समक्ष राज्य सरकार की ओर से अपने वित्तीय प्रस्तावों के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया गया, जिसे वित्त आयोग के अध्यक्ष ने अत्यंत प्रभावशाली बताया. बैठक में कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, सड़क जैसी विभिन्न प्रकार की बुनियादी सुविधाओं के विकास से संबंधित प्रस्तावों के बारे में वित्त आयोग के साथ व्यापक विचार-विमर्श हुआ.
स्वास्थ्य और वाणिज्यिक कर मंत्री अमर अग्रवाल, बैठक में गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री पुन्नूलाल मोहले, स्कूल शिक्षा और आदिम जाति विकास मंत्री केदार कश्यप, राजस्व,उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय, कृषि और जल संसाधन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव विवेक ढांड और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव डी.एस. मिश्रा ने प्रस्तुतिकरण दिया. उनके अलावा गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव एन.के. असवाल ने भी विभागीय प्रस्तुतिकरण दिया. आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव तथा नया रायपुर विकास प्राधिकरण (एन.आर.डी.ए.) के अध्यक्ष एन. बैजेन्द्र कुमार ने नया रायपुर विकास परियोजना के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया. पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव एम.के. राउत और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव आर.पी. मण्डल ने भी विभागीय प्रस्तुतिकरण दिया.

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