दो प्रधानमंत्रियों का झगड़ा

Saturday, January 4, 2014

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मोदी और मनमोहन

रायपुर | समाचार डेस्क: शुक्रवार को मनमोहन सिंह ने पत्रकार वार्ता में दो होने वाले प्रधानमंत्रियों के बीच झगड़े का एजेंडा तय कर दिया है. इसके साथ मनमोहन सिंह ने अपने अवकाश ग्रहण करने के सवाल पर स्वीकृति की मुहर लगा दी है. पत्रकार वार्ता से जाते-जाते मनमोहन सिंह ने टिप्पणी की कि नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना देश के लिये विनाशकारी होगा. उन्होंने इसी के साथ गुजरात दंगों के दाग को फिर से बहस का केन्द्र बिंदु बना दिया जिसे धोने के लिये नरेन्द्र मोदी ने कड़ा परिश्रम किया है.

देश में फिलहाल दो ऐसे व्यक्ति हैं जिन के नाम के आगे प्रधानमंत्री शब्द का तगमा लगता है. पहला मनमोहन सिंह स्वयं जो कि पदेन प्रधानमंत्री हैं दूसरा नरेन्द्र मोदी जो भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम से जाने जाते हैं. मनमोहन सिंह ने अपने अवकाश ग्रहण करने के साथ ही यह भी जोड़ दिया कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिये बेहतर उम्मीदवार हैं. वह राहुल गांधी जो आम आदमी पार्टी के उदय के बाद से नेपथ्य में जाते नजर आ रहे थे, मनमोहन सिंह के बयान के बाद फिर से समाचार पत्रो की सुर्खियों में आने के पात्र बन गये हैं.

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने देश के जनमानस को आकर्षित करने के लिये राष्ट्रवाद का सहारा लिया है. गुजरात में भारत के पूर्व गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की भव्य मूर्ति बनाना,वोट फॉर इंडिया का नारा देकर जनता को लुभाना इसी श्रेणी में आता है. गुजरात के विकास के नाम पर नरेन्द्र मोदी गुजरात के दंगों के दाग को ढ़कने में कुछ हद तक कामयाब हुए थे लेकिन मनमोहनी चाल ने उसे फिर से समाचार पत्रो तथा खबरिया चैनलों में बहस का मुद्दा बना दिया है.

कहां तो मनमोहन सिंह आये थे प्रेस को अपनी उपलब्धियां गिनाने लेकिन जाते-जाते फिर से गुजरात के दंगों के नाम पर मोदी को देश के लिये विनाशकारी कह गये.अब कुछ समय तक मोदी तथा गुजरात दंगों पर बहस चलेगी जिसे कांग्रेस मई 2014 तक ले जाने की कोशिश करेगी.मनमोहन सिंह ने साफ कर दिया है कि वे फिर से प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहते हैं परन्तु उनके टिप्पणी ने इशारों ही इशारों में कह दिया कि किसे अगला प्रधानमंत्री होना चाहिये.

यूं तो मनमोहन सिंह के अर्थशास्त्र से देश त्रस्त है.उनकी विदेशी कंपनियों के लिये भारत के बाजारों के द्वार खोल देने का परिणाम देश लंबे समय तक भुगतता रहेगा. मनमोहन सिंह अपने अमरीका तथा नैगम घरानों से प्रेम पर कभी पर्दा डालने का प्रयास नहीं करते हैं. उनका अर्थशास्त्र खुले रूप से अमीरों को और अमीर तथा गरीबों को और गरीब बना रहा है जिसका विनाश मनमोहन सिंह को नजर नहीं आता है.

मनमोहन सिंह को पता है कि उन्होंने देश को जिस राह पर डाल दिया है उससे लौटना मुश्किल नहीं तो कठिन तो जरूर है. मनमोहन सिंह की दिली इच्छा है कि उनके बाद उनके विरासत को राहुल गांधी संभाले. समाचार पत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार इसके लिये उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनियां गांधी के सामने प्रस्ताव भी रखा है कि वे राहुल के पथप्रदर्शक की भूमिका में रहना चाहते हैं.

हालांकि नरेन्द्र मोदी के पास देश की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिये कोई रोड मैप नहीं है जिससे मनमोहन सिंह द्वारा पैदा की गई दुश्वारियों से देशवासियों को निजात मिल सके. मोदी तो राष्ट्रवाद के नाव पर चढ़कर 2014 की चुनावी नैय्या को बस पार लगाना चाहते हैं.

शुक्रवार के दिल्ली में हुए प्रेस वार्ता में मनमोहन सिंह ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी तथा कांग्रेस के वंशानुक्रम के अनुसार अगला प्रधानमंत्री के लिये उम्मीदवार राहुल गांधी के बीच होने वाले झगड़े का एजेंडा तय करके नेहरु-गांधी परिवार की मदद की है. गुजरात दंगों के फिर से भारतीय राजनीति का एजेंडा बन जाने से नरेन्द्र मोदी को हानि तथा राहुल गांधी को लाभ होगा. इसे दो होने वाले प्रधानमंत्रियों के बीच के झगड़े के नाम से जाना जायेगा जिसकी नींव भारत के पदेन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रख दी है.

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