कलेक्टर के खिलाफ पूर्व सैनिक का मोर्चा

Tuesday, September 24, 2013

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सैनिक प्रेम चंद पांडे

कोरबा | संवाददाता: कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगा चुके एक सेवानृवित्त फौजी ने अपने आत्मसम्मान की लडाई के लिये कोरबा कलेक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया हैं. कोरबा के रिटार्यड फौजी प्रेम चंद पाण्डेय ने मंगलवार से शहर के सुभाष चौक में “कारगिल योद्धा के अपमान” का बैनर लगा आमरण अनशन की शुरुआत कर दी है.

मामला कोरबा कलेक्टर रजत कुमार द्वारा प्रेमचंद पांडे के कथित रूप से अपमान किए जाने का है. रिटायर्ड फौजी प्रेम चंद पांडे का कहना है कि वे कुछ दिन पहले शासकीय जमीन उपलब्ध कराने का आवेदन लेकर कलेक्टोरेट कार्यलय पहुंचे थे. यहां उन्होंने ने कलेक्टर से मुखातिब होते हुए खुद का परिचय कारगिल योद्धा के रुप मे दिया और रिटायड फौजियो को मिलने वाली जमीन के संबंध में चर्चा करने का प्रयास किया.

प्रेम चंद की माने तो इसके बाद कलेक्टर भडक उठे और उन्हें फटकारते हुए कहने लगे तुम ये कारगिल योद्धा का रट क्यो लगा रखे हो?.. तुम बार बार रिटायड फौजी होने का धौस मत दिखाओ. यदि फिर दोबारा रिटायड फौजी होने की बात मेरे सामने कही तो जमीन तो दूर तुम्हे पानी तक नही मिलेगा.

रिटायर्ड फौजी प्रेम चंद पांडे ने इसके बाद शिकायत उच्चाधिकारियों से की लेकिन उन्होंने ङी मामले में कुछ कार्रवाई नहीं की. इससे पहले उद्योग विभाग ने पाण्डेय को एनओसी जारी कर दिया था. इसी अपमान का बदला लेने के लिए रिटायर्ड फौजी श्री पाण्डेय ने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया है.

श्री पांडे का कहना है की वह अपना अनशन तब तक नही तोडेंगे जब तक कलेक्टर उनके द्वारा किये गए अपमान की सबके सामने स्वीकार नहीं कर लेते. श्री पांडेय ने साफ कहा है की वो ऐसा नहीं करने की स्थिति में जान रहते तक आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ता रहेगा.

देश के लिये कारगील और अन्य कई युद्ध लडने वाले प्रेमचंद्र को इस बात का मलाल भी नहीं होगा कि कभी अपना हक मांगने पर उसे इस तरह से लज्जित कर दुर्व्यवहार किया जायेगा.

कोरबा के प्रगतिनगर दर्री में रहने वाले प्रेमचंद पाण्डेय 16 साल फौज में रहे. 25 जून 1996 में उनकी गनर ट्रेड में भर्ती हुई थी और 31 मार्च 2013 को रिटायर हुए. वे पहले सिकंदराबाद में रहे. इसके बाद कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लिया. युद्ध के दौरान राइफल, स्टेन मशीनगन सहित बोफोर्स तोप चलाने वाले प्रेमचंद जब सेवानिवृत्त हुए तो आर्मी के जनरल से उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया.

देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले प्रेमचंद कलेक्टर के व्यवहार से बेहद आहत हुए हैं. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की योजना के तहत रिटायर्ड फौजियों को 5 एकड़ शासकीय भूमि आवंटित किए जाने का प्रावधान है. उन्होंने ग्राम चोरभट्ठी स्थित खसरा नंबर 404 में स्थित 30 एकड़ जमीन में 5 एकड़ जमीन आवंटन के लिए आवेदन दाखिल किया है. इसके लिए पिछले कई महिनों से वे शासकीय दफ्तारों का चक्कर काट रहे हैं. वे अब तक व्यापार उद्योग, विद्युत वितरण विभाग, खनिज विभाग, पीडब्ल्यूडी व एनटीपीसी से एनओसी प्राप्त कर चुके हैं.

जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़वाने प्रेमचंद विगत दिनों विकास यात्रा में पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से भी मुलाकात की थी. उनका कहना है कि शनिवार को दोपहर 2 बजे वे कलेक्टर रजत कुमार से मिलने उनके कक्ष में पहुंचे जहां उनके अपमान किए जाने की घटना हुई है.

प्रेमचंद ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि भरी भीड़ के सामने उनका अपमान किया गया है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या रिटायर्ड फौजी अपना परिचय भी नहीं दे सकता. प्रेमचंद के पिता ब्रह्मानंद सिंचाई विभाग में कार्यरत थे, वे भी इसी वर्ष 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए हैं.

प्रेमचंद का कहना है कि वर्तमान में विभागीय आवास में रह रहे हैं. उन्हें मकान खाली करने कहा गया है. खुद का मकान नहीं होने की वजह से वे कोशिश कर रहे थे कि जल्द ही भूमि का आवंटन हो जाए, पर उनका विषय अब जमीन नहीं रहा. उन्हें अपमान का जो घूंट पीना पड़ा है, इसके लिए वे अब इंसाफ की गुहार लगाएंगे. फिर इसके लिए मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक मिलने क्यों न जाना पड़े.

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है कि अपमानित होकर जीने से अच्छा तो मर जाना बेहतर है, इसलिए वे जल्द ही अन्न जल त्याग कर धरने पर बैठेंगे.. मामले को लेकर मिली शिकायत के मद्देनजर दूसरे पक्ष की बात जानने की गरज़ से कलेक्टर रजत कुमार से मिलकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने इस मसले पर कोई भी बात कहने से इंकार कर दिया.

वहीं दूसरी ओर मामले की जानकारी प्रदेश के गृहमंत्री के ध्यान में लाये जाने पर उन्होने न तो मामले की सत्यता जानने का कोई भरोसा दिलाया न ही मामले की जांच की बात कही बल्कि रिटायर्ड फौजी के द्वारा अनशन किये जाने की बात पर वे समय आने पर देखने की बात कहते है.

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