चुनाव आचार संहिता कल से ?

Wednesday, October 2, 2013

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निर्वाचन आयोग

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में चुनाव आचार संहिता शुक्रवार से लग जायेगी. हालांकि राज्य में कुछ विश्वसनीय सूत्रों ने गुरुवार से ही चुनाव आचार संहिता लागू होने की बात कही है लेकिन चुनाव आयोग ने जिस तरह की तैयारी शुरु की है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि शुक्रवार यानी 4 अक्टूबर को चुनाव आचार संहिता की घोषणा की जाएगी. गौरतलब है कि पांच राज्यों सहित छत्तीसगढ़ में नवंबर माह में विधानसभा के चुनाव अपेक्षित हैं.

आचार संहिता लागू होनें के पश्चात् क्या क्या किया जा सकता है तथा क्या करना वर्जित है उसे जानना दिलचस्प होगा-

चुनाव आचार संहिता लागू होते ही सभी सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के तहत काम करने लगते हैं. उन्हें चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार कार्य करना पड़ता है.

मुख्यमंत्री या मंत्री इसके पश्चात् न तो कोई घोषणा कर सकेंगे, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन. सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुँचता हो. राजनीतिक दलों के आचरण और कार्यकलाप पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक होंगे ही.

चुनाव आचार संहिता के लागू होने के पश्चात् मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रीगण शासकीय दौरा अपवाद को छोड़कर नही कर सकेंगे. विवेकाधीन निधि से अनुदान या स्वीकृति, परियोजना या योजना की आधारशिला, सड़क निर्माण या पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन नही दे सकेंगे.

शासकीय सेवक किसी भी अभ्यार्थी के निर्वाचन, मतदाता या गणना एजेंट नहीं बनेंगे. मंत्री यदि दौरे के समय निजी आवास पर ठहरते हैं तो अधिकारी बुलाने पर भी वहॉँ नहीं जाएँगे. चुनाव कार्य से जाने वाले मंत्रियों के साथ नहीं जाएँगे. जिनकी ड्यूटी लगाई गई है, उन्हें छोड़कर सभा या अन्य राजनीतिक आयोजन में शामिल नहीं होंगे. राजनीतिक दलों को सभा के लिए स्थान देते समय भेदभाव नहीं करेंगे.

कोई दल ऐसा काम न करे, जिससे जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले. राजनीतिक दलों की आलोचना कार्यक्रम व नीतियों तक सीमित हो, न ही व्यक्तिगत. धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए.

मत पाने के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग न करें. जैसे-रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना आदि. किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते या भूमि का उपयोग न करें. किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा न डालें.

राजनीतिक दल ऐसी कोई भी अपील जारी नहीं करेंगे, जिससे किसी की धार्मिक या जातीय भावनाएँ आहत होती हों.

सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को दी जाए. दल या अभ्यर्थी पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो स्थान उन्होंने चुना है, वहॉँ निषेधाज्ञा तो लागू नहीं है. सभा स्थल में लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति पहले प्राप्त करें. सभा के आयोजक विघ्न डालने वालों से निपटने के लिए पुलिस की सहायता करें.

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