मैसेजेज़ 90 दिन नहीं रखना पड़ेगा

Tuesday, September 22, 2015

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नई दिल्ली | संवाददाता: यूजर को सोशल मीडिया के मैसेजेज़ 90 दिन सुरक्षित नहीं पड़ेगा. केन्द्र सरकार ने सोमवार को जारी नेशनल इन्क्रिप्शन पॉलिसी मसौदे को वापस ले लिया है. टेलिकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने मंगलवार को कहा, ”मैंने कहा है कि ड्राफ्ट वापस लिया जाए, इसमें जरूरी बदलाव करके दोबारा इसे वापस लाया जाए.” केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा, ”मैं साफ कर देना चाहता हूं कि जो सरकार की ओर से कल रिलीज किया गया, वो केवल ड्राफ्ट था. सरकार का नजरिया नहीं है. हमारी सरकार सोशल मीडिया की आजादी का समर्थन करती है. हमें सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर गर्व है.”

टेलिकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने भी मीडिया को बताया कि यह जिम्मेदारी सिर्फ इंटरनेट बेस्ड मैसेजिंग सर्विस देने वाली कंपनियों पर होगी. कोई नियम नहीं बनाया गया है. सिर्फ राय मांगी गई है. सरकार की तरफ से यह सफाई दी गई कि ड्राफ्ट पॉलिसी में सोशल मीडिया साइट्स और मैसेजिंग ऐप्स को छूट दी जाएगी. हालांकि, बैकिंग ट्रांजेक्शन के दौरान बनने वाले इन्क्रिप्टेड लॉग्स पर सरकार क्या करेगी? इसे लेकर सस्पेंस कायम है.

उल्लेखनीय है कि सोमवार को केन्द्र सरकार के टेलीकॉम मंत्रालय द्दारा जो मसौदा पेश किया गय़ा था उसके अनुसार वाट्सऐप, गूगल हैंग आउट, वीचैट, वाइबर तथा अन्य सोशल मीडिया के द्वारा भेजे गये तथा रिसीव किये गये मैसेजेज़ को 90 दिनों तक अपने पास सुरक्षित रखने का प्रावधान प्रस्तावित था. जिससे सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मांगे जाने पर इसे दिखाया जा सके. सोमवार को यह मसौदा आने के बाद इसका सोशल मीडिया पर विरोध शुरु हो गया. फ़ेसबुक पर #ModiDontReadMyWhatsApp ट्रेंड शुरू हुआ. वहीं ट्विटर पर #Encryption Policy ट्रेंड करने लगा.

सोशल मीडिया पर भेजे जाने वाले मैसेजेज़ एनक्रिप्टेड होते हैं जिसे बीच में पढ़ा नहीं जा सकता. जब ये मैसेजेज़ डिलीवर होते हैं तो प्लेन टेक्सट में डिलीवर होते हैं. दरअसल, सरकार की मंशा है कि विदेशों में सर्वर रखने वाले वाट्सऐप, गूगल हैंग आउट, वीचैट, वाइबर के लिये मैसेज सुरक्षित रखना कानूनन आवश्यक हो जाये तथा जरूरत पड़ने पर सरकारी एजेंसियों को इसे पेश किया जाये. हालांकि, इसका विरोध करने वालों का यह भी कहना है कि सरकार साइबर जासूसी करने का कानूनी हथियार चाहती है.

टेलिकॉम मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन एन.एन. कौल ने कहा कि आम यूज़र्स को इन्क्रिप्टेड डाटा 90 दिन तक सुरक्षित रखने पर मजबूर नहीं किया जाएगा. वहीं, टेलिकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने भी मीडिया को बताया कि यह जिम्मेदारी सिर्फ इंटरनेट बेस्ड मैसेजिंग सर्विस देने वाली कंपनियों पर होगी.

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