नोटबंदी ने बदला यूपी का समीकरण

Friday, December 16, 2016

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लखनऊ | समाचार डेस्क: नोटबंदी ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के गणित को बदलकर रख दिया है. कम से कम कांग्रएस का तो यही मानना है. इसलिये अब कांग्रेस वहां गठबंधन करने के लिये 100 सीटों की मांग कर रहा है. समाजवादी पार्टी भी वहां से 300 सीटों पर अपना दावा ठोक रही है. ऐसे में 404 विधानसभा सीटों में से मात्र 4 सीटें ही बच जाती हैं. जाहिर है कि इन 4 सीटों से अजित सिंह की आरएलडी तथा अन्य पार्टियों को मनाया नहीं जा सकता है.

उत्तर प्रदेश में यूं तो असल मुकाबला समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच ही माना जा रहा है. हालांकि नोटबंदी के बाद बदले चुनावी समीकरणों में कांग्रेस को अपनी बढ़ी अहमियत का एहसास है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस राज्य में उपमुख्यमंत्री पद की दावेदारी के जरिये खुद को मजबूत दावेदार दिखाना चाहती है.

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले और उसके बाद लोगों को हो रही दिक्कत के चलते चुनाव का प्लॉट बदल गया है और भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा. पार्टी का मानना है कि ऐसे में वह सपा और बसपा के लिए कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गई है.

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, “सपा नेतृत्व जानती है कि कांग्रेस को साझेदार बनाने पर उसे भाजपा और बीएसपी के खिलाफ यादव-मुस्लिम वोटरों को एकजुट करने में मदद मिलेगी. उसी तरह बीएसपी भी अगर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है, तो उसे भी दलित-मुस्लिम वोटरों को लामबंद करने में मदद मिलेगी.” वह साथ ही कहते हैं, “हालांकि, अभी हम सिर्फ सपा से बात कर रहे हैं.”

कांग्रेस से जुड़े एक अन्य नेता ने उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में अपनी अहमियत की तरफ इशारा करते हुए कहा कि राज्य में अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती है तो वह भले ही 100 सीटें ना जीते, लेकिन इससे सपा और बसपा का खेल खराब हो सकता है.

हालांकि यहां यह बात भी ध्यान देने वाली है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को दोबारा उभारने के लिए लंबे समय से चल रही कोशिशें सफल नहीं हो पाई है और ऐसे में पार्टी को लग रहा है कि उसे यहां भाजपा को हराने पर जोर लगाना चाहिये. इन्हीं वजहों से उस पर भी राज्य की दो बड़ी ताकतों सपा या बसपा से गठबंधन का दबाव है.

वैसे कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की हो रही कोशिशों की खबर पहले से है परन्तु नोटबंदी से बदले हालात के कारण कांग्रेस अपना पांसा बदले हुये हालात के अनुसार फेंक रही है.

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