चीन पंचशील समझौता नहीं मानता

Saturday, June 28, 2014

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भारत-चीन का झंडा

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: मोदी सरकार को चीन के साथ व्यापार के साथ सीमा विवाद को लेकर भी जूझना पड़ेगा. एक ओर भारत के उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, चीन में पंचशील समझौते के 60वीं वर्षगांठ पर हो रहे समारोह में भाग लेने गये हुए हैं वहीं दूसरी ओर चीन ने एक विवादित नक्शा प्रकाशित किया है. जिसमें अरूणाचल प्रदेश के साथ ही जम्मू-कश्शमीर के कुछ हिस्सों को अपना बतलाया है.

चीन की इस हरकत को राजनयिक हल्कों में बड़े हैरत के साथ देखा जा रहा है. कहीं न कहीं चीन उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के उपस्थिति को नकारने का इशारा कर रहा है. वहीं इसी माह के 24 तारीख को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के नाव लद्दाख में पंपोग झील में भारतीय हिस्से में 5 किलोमीटर तक घुस आये थे. गौरतलब है कि पंपोग झील तिब्बत में आता है जो चीन का हिस्सा है परन्तु इस कुछ हिस्सा भारत में भी आता है. 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय भी इस पंपोग झील को लेकर विवाद उठा था.

उल्लेखनीय है कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद चीनी सरकारी अखबार ने उनकी तुलना अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन से की थी. जिसका अर्थ यह होता है कि जिस प्रकार से निक्सन ने तमाम वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर चीन के साथ व्यापार की शुरुआत की थी, मोदी के आने से भी चीन उसी घटना के पुनरावृति की उम्मीद कर रहा है. ज्ञात्वय रहे कि मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते चीन के साथ व्यापार को बढ़ावा दिया था. परन्तु चीन के ताजा हरकतों से जिसमें विवादित नक्शा जारी करना तथा भारतीय सीमा में घुसपैठ करना अशुभ संकेतों से भरा हुआ है.

पूर्व से ही भारत-चीन के मध्य अक्शाई चीन को लेकर विवाद होता आया है तथा वर्तमान में अक्शाई चीन, चीन के कब्जे में ही है. ऐसा पहली बार हुआ है कि चीन ने जम्मू-कश्मीर के भू-भाग पर अपना दावा किया हो. चीन का भारत के साथ 1954 में पंचशील समझौता हुआ था. मुख्यतः इसके द्वारा भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा मान लिया था आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के लिये इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे. उस पंचशील समझौते के अनुसार एक दूसरे की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करना, परस्पर अनाक्रमण का पालन करना, एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना, समान और परस्पर लाभकारी संबंध तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की बात की गई थी.

हालांकि, चीन ने 1962 के युद्ध में इस समझौते का उल्लंघन किया था परन्तु आज के चीन के हालात को देखते हुए इस बात की उम्मीद की जा रही है कि विवाद के बजाये चीन व्यापार पर ज्यादा ध्यान देगा. इसे चीन द्वारा, मोदी की तुलना भारतीय निक्सन के रूप में किये जाने से ऐसा लग रह था कि चीन भविष्य में सीमा विवाद से परहेज करने वाला है. चीन के ताजा घुसपैठ तथा विवादित नक्शा प्रकाशित करने से यह साबित हो जाता है कि चीन व्यापार से ज्यादा अहमियत, अपनी भौगोलिक दावेदारी को देता है.

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