छत्तीसगढ़ को 20लाख टन राख की सौगात

Wednesday, March 11, 2015

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रायपुर | विशेष संवाददाता: दिगर राज्यों को बिजली बेचने के बाद छत्तीसगढ़ में निजी ताप विद्युत संयंत्रों ने 20 लाख टन राख छोड़ रखा है. जी हां, छत्तीसगढ़ में निजी क्षेत्र के नौ ताप विद्युत संयंत्रों ने कुल मिलाकर 20,37,748 टन राख रख छोड़ा है जो राज्य में प्रदूषण फैलाने का काम कर रहें हैं.

छत्तीसगढ़ में निजी क्षेत्र के कुल 81 ताप विद्युत संयंत्र हैं जिनमें से 72 ने बिजली बनाने के बाद अवशेष के रूप में प्राप्त राख विभिन्न कामों में लगा दिया है. जबकि 9 ताप विद्युत संयंत्र अपने द्वारा उत्पन्न किये जा रहें राखों को पूरी तरह से अन्य कामों में जैसे ईंट बनाने के काम आदि में लगाने में असमर्थ हैं, फलस्वरूप छत्तीसगढ़वासियों को उनके संयंत्रों द्वारा छोड़े गये राखों के साथ जिंदगी बितानी पड़ रही है.

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुसार केएसके महानदी वर्धा पावर, जांजीर-चांपा ने 1,99,242 टन, डीबी पावर लिमिटेड, जांजगीर-चांपा ने 56978 टन, बाल्कों, कोरबा ने 7,97,007 टन, बाल्कों कैप्टिव प्लांट, जमनीपाली ने 1,94,090 टन, लैंको अमरकंटक पावर लिमिटेड, करतला कोरबा ने 93,524 टन, एसीबी इंडिया लिमिटेड, कसाईपाली कोरबा ने 45,811 टन, एसीबी इंडिया लिमिटेड, कोरबा ने 6,520 टन, स्पेक्ट्रम कोल एंड पावर लिमिटेड, कटघोरा ने 23,231 टन, तथा जिंदल पावर लिमिटेड, रायगढ़ ने 6,21,345 टन राख बिजली बनाने के राखड़ बांध में जमाकर दिया है.

आकड़ों की माने तो छत्तीसगढ़ में राखड़ से प्रदूषण फैलाने वालों में सबसे आगे वेदांता की बाल्कों तथा जिंदल की जिंदल पावर, रायगढ़ है. इन दोनों ने क्रमशः 7,97,007 टन तथा 6,21,345 टन राख, राखड़ बांधों में डंप कर दिया है.

छत्तीसगढ़ में निजी क्षेत्र के ताप विद्युत संयंत्रों द्वारा कुल 20 लाख टन राख छोड़ा गया है जिसमें से 14 लाख टन राख इन्हीं दोनों कंपनियों के द्वारा डंप किये गये हैं. जबकि 72 संयंत्रों ने उतने ही बिजली का उत्पादन किया है जितने राख को वे ठिकाने लगाने में कामयाब हैं.

जाहिर है कि बाल्कों तथा जिंदल को छत्तीसगढ़ में फैल रहे प्रदूषण की नहीं अपने मुनाफे पर ज्यादा जोर है. उल्लेखनीय है कि उन राखड़ बांधों के फूटने से फसलों को नुकसान होता है जैसे कुछ समय पहले सीपत में हुआ था तथा इसके उड़ते हुए कणों के कारण दमा तथा छाती के विभिन्न रोग होते हैं.

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