सरगुजा, बस्तर फ्लोराइड से प्रभावित

Monday, December 21, 2015

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हड्डियों में फ्लोरोसिस

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में सरगुजा तथा बस्तर के गांव फ्लोराइड की अधिकता से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. यहां के गांवों के पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा स्वीकार्य सीमा से ज्यादा पाया गया है. नतीजन यहां के गांवों में जो पहले से ही चिकित्सीय सुविधाओं की दृष्टि से पिछड़े हुये हैं, ग्रामीण बीमार पड़ते हैं.

छत्तीसगढ़ में सरगुजा के 67 गांवों, बस्तर के 56 गांवों, कोण्डागांव के 30 गांव, कांकेर के 13 गांव, बीजापुर के 8 गांव, बलरामपुर के 25 गांव, सूरजपुर के 39 गांव तथा कोरिया के 32 गांवों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा स्वीकार्य सीमा से ज्यादा पाया गया है.

छत्तीसगढ़ के कुल 395 गांव पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा से पीड़ित हैं जिसमें से 270 गांव सरगुजा तथा बस्तर क्षेत्र के हैं. इन्हीं इलाकों में आदिवासी भी सबसे बड़ी संख्या में रहते हैं.

उल्लेखनीय है कि पीने के पानी में फ्लोराइड की अधिका मात्रा होने से इसका दांतो तथा हड्डियों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. लंबे समय तक फ्लोराइड की अधिक मात्रा लेने से हड्डियों में फ्लोरोसिस नामक बीमारी हो जाती है. जिसमें वे अकड़ जाते हैं तथा जोड़ों में दर्द होने लगता है.

हड्डियों में फ्लोरोसिस होने से हड्डियों की संरचना बदल जाती है तथा लिगामेंट सख्त हो जाते हैं.

उल्लेखनीय है कि एक सर्वे के अनुसार अंबिकापुर में फ्लोराइड के 72, बालोद में 91, बलरामपुर में 50, बस्तर में 183, कांकेर में 227, कोरबा में 126 तथा सूरजपुर में 89 केस मिले थे. यह सर्वे साल 2013-14 में केन्द्र सरकार द्वारा किया गया था.

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