माधव राव सप्रे सम्मान की स्थापना

Wednesday, June 18, 2014

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माधव राव सप्रे

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ सरकार ने माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान की स्थापना की है. गौरतलब है कि माधव राव सप्रे प्रसिद्ध साहित्यकार तथा छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक रहें हैं. 19 जून को उनकी जयंती है.

यह सम्मान प्रति वर्ष एक ऐसे मनीषी को दिया जाएगा, जिन्होंने मीडिया के क्षेत्र में अपने विशिष्ट रचनात्मक लेखन और हिन्दी भाषा के प्रति समर्पण भाव से रचनात्मक कार्य करके राष्ट्र का गौरव बढ़ाया हो. सम्मान राशि दो लाख 50 हजार रुपये की होगी.

छत्तीसगढझ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सप्रे जी की जयंती पर अपने संदेश में कहा है कि पंडित माधव राव सप्रे ने आज से लगभग 114 वर्ष पहले छत्तीसगढ़ के पेण्ड्रा को अपनी कर्मभूमि बनाकर एक ऐसे दौर में ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ नामक साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन शुरू किया, जब आज की तरह प्रिन्टिग टेक्नॉलॉजी के अत्याधुनिक संसाधन नहीं थे.

उन्होंने अपने सहयोगी रायपुर के दिवंगत रामराव चिंचोलकर और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित वामन बलीराम लाखे के साथ वर्ष 1900 में इस पत्रिका का प्रकाशन प्रारंभ किया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित माधव राव सप्रे एक गंभीर चिंतक और संवेदनशील साहित्यकार थे. उनकी लिखी कहानी ‘टोकरी भर मिट्टी’ को आधुनिक हिन्दी की पहली कहानी के रूप में मान्यता मिलना भी छत्तीसगढ़वासियों के लिए गर्व की बात है.

उल्लेखनीय है कि पंडित माधव राव सप्रे का जन्म वर्तमान मध्य प्रदेश के पथरिया में 19 जून 1871 को हुआ था. उनकी प्राथमिक शिक्षा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में और हाई स्कूल की पढ़ाई रायपुर में हुई. वह सन् 1890 में रायपुर में ही एन्ट्रेंस की शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए जबलपुर गए.

उन्होंने नागपुर से बी.ए. और ग्वालियर से इलाहाबाद विश्वविद्यालय की एफ.ए. की शिक्षा की हासिल की. सप्रे जी 1899 में छत्तीसगढ़ के पेण्ड्रा के राजकुमार के अंग्रेजी शिक्षक बने. सप्रे ने वहीं से सन् 1900 में ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का संपादन शुरू किया.

उनकी यह पत्रिका देशभर में प्रसिद्ध हो गयी. इसका प्रकाशन सन् 1902 तक चलता रहा. पत्रिका के संपादन में रामराव चिंचोलकर उनके सहयोगी थे, जबकि प्रकाशन का दायित्व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित वामन बलीराम लाखे ने संभाला था.

पंडित माधव राव सप्रे ने रायपुर में सन् 1900 में राष्ट्रीय चेतना और चिंतन के प्रथम केन्द्र के रूप में आनंद समाज वाचनालय की स्थापना में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया.

उन्होंने सन् 1905 में नागपुर में हिन्दी ग्रंथ प्रकाशन मण्डली की स्थापना की और सन् 1907 में 13 अप्रैल से हिन्दी केसरी का प्रकाशन शुरू किया. अपनी पत्रकारिता और लेखनी के माध्यम से स्वतंत्रता आन्दोलन को प्रोत्साहित करने की वजह से पंडित माधव सप्रे को अंग्रेज हुकूमत ने 22 अगस्त 1908 को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 124-अ के तहत गिरफ्तार भी कर लिया था. कुछ महीनों बाद उनको रिहा किया गया.

सप्रे जी ने रायपुर में ही सन् 1912 में जानकी देवी कन्या पाठशाला की स्थापना करवायी. उन्होंने लोकमान्य पंडित बाल गंगाधर तिलक के मराठी ग्रंथ ‘गीता रहस्य’ का हिन्दी अनुवाद किया, जो सन् 1916 में प्रकाशित हुआ. पंडित माधव सप्रे ने रायपुर में सन् 1920 में राष्ट्रीय विद्यालय और हिन्दु अनाथालय की स्थापना में भी अहम भूमिका निभायी. सप्रे का जी का निधन 23 अप्रैल 1926 को रायपुर में हुआ.

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