छत्तीसगढ़: टोनही बता बदला लिया

Friday, October 7, 2016

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प्रताड़ना

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में सरपंच ने टोनही बता महिला को पिटवाया है. एक तरफ सरकार डिजीटल छत्तीसगढ़ बनाने का प्रयास कर रही है तो दूसरी तरफ आज भी छत्तीसगढ़ टोनही के कलंक से मुक्त नहीं पाया है. राजधानी रायपुर से लगे गांव में सरपंच ने अपना विरोध करने वाली महिला को टोनही बताकर सरेआम पिटवाया है.

रायपुर से लगे खरोरा थाने गनियारी गांव में यह घटना 2 अक्टूबर के दिन घटी. इस गांव के सरपंच ने मुनादी करवा दी थी कि लक्ष्मी वर्मा टोनही है. उसके बाद स्कूल में करीब 150 लोगों की भीड़ लग गई. जहां पर सरपंच के कहने पर कुछ महिलाओँ ने लक्ष्मी वर्मा को अधमरा होते तक पीटा. गांव वाले वहां तमाशा देखते रहे.

जब गांव के कोटवार ने इसका विरोध किया तो उसकी बात भी नहीं सुनी गई. पुलिस के आने पर महिला को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां से डिस्चार्ज होने के बाद महिला रायपुर में ही अपने रिश्तेदार के यहां रुकी हुई है. वह गांव जाने से डर रही है.

टोनही बताकर पीटी गई महिला लक्ष्मी वर्मा का कहना है कि गांव के स्कूल में मिड-डे मील आशा स्व-सहायता समूह के द्वारा बनाया जाता था. जिसमें लक्ष्मी वर्मा भी शामिल है. चार माह पूर्व सरपंच ने मिड-डे मील का काम इस समूह से छीनकर पांच महिलाओं के दूसरे समूह को दे दिया था.

काम छीनने से नाराज आशा स्व-सहायता समूह ने एडीएम से अपील की थी. जिस पर एडीएम ने यथा-स्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था. लक्ष्मी वर्मा का कहना है कि इसी ख़फा होकर सरपंच ने टोनही होने का एलान करवा दिया तथा उन्हीं महिलाओं से जिसे मिड-डे मील का ठेका दिया गया था उसे पिटवाया है.

वहीं, सरपंच बहुदादास टंडन का कहना है कि महिला चावल की चोरी करती थी. खरोरा के टीआई संजीव मिश्रा का कहना है कि मामला मिड-डे मील के झगड़े का है, टोनही प्रताड़ना का नहीं. उन्होंने कहा कि पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है.

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के डॉ. दिनेश मिश्रा का कहना है कि आपस के विवाद को टोनही नाम दे दिया गया है.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में औसतन हर तीसरे दिन एक महिला को टोनही कहकर प्रताड़ित किया जाता है. छत्तीसगढ़ में वर्ष 2005 से जून 2015 तक टोनही प्रताड़ना के 1,268 मामले सामने आये हैं.

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