छत्तीसगढ़: आईजीपी जब बने शिक्षक

Saturday, January 30, 2016

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दंतेवाड़ा स्कूल

अम्बिकापुर | समाचार डेस्क: पुलिस विभाग के अधिकारी अक्सर अपने विभागीय कार्यो के संपादन में ही जुटे रहते हैं. ऐसे में अपने विभागीय दायित्वों के साथ ही सामाजिक दायित्व निभाने के लिए उन्हें समय नही मिल पाता है. फिर भी सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक टीजे लांगकुमेर कुछ समय के लिए शिक्षक बनकर बच्चों को पढाया.

उन्होंने प्रदेश व्यापी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवता अभियान के तहत कल जशपुर जिले के दूरस्थ ग्राम डंकरी के प्राथमिक शाला का निरीक्षरण किया तथा स्कूली बच्चों एवं शिक्षकों से बात-चीत कर शिक्षा की गुणवता की जानकारी प्राप्त की .

पुलिस महानिरीक्षक टीजे लांगकुमेर ने स्कूली बच्चों को हिन्दी एवं अंग्रेजी लिखाकर भी देखा तथा बच्चों की लिखावट की सराहना की. उन्होंने बच्चों से समान्य ज्ञान संबंधी प्रश्न भी पूछे तथा पुस्तक पढ़ाकर भी उनके ज्ञान के स्तर की जानकारी ली. श्री लांगकुमेर ने बच्चों से कहा कि वे पढाई के लिए कभी कोताही न बरतें बल्कि पूरे उत्साह, लग्न और मन लगाकर पढाई करें.

उन्होंने कहा कि मानव जीवन में बचपन का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है. श्री लांगकुमेर ने कहा कि यदि कोई बच्चा बचपन में पूरी जिम्मेदारी के साथ पढाई करता है, तो उसके परीक्षा परिणाम भी अच्छे आते हैं. साथ ही बचपन से किसी भी कार्य को जिम्मेदारी से करने की आद्त बन जाती है, जो उसके जीवन पर्यन्त काम आता है.

पुलिस महानिरीक्षक श्री लांगकुमेर ने शिक्षकों के कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि वे बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर राष्ट्र निर्माण में अपने पदीय एवं सामाजिक दायित्वों का और बेहतर ढंग से निर्वहन करें.

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