मृत्यु दोष टालने कुत्ते से शादी!

Saturday, January 16, 2016

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आवारा कुत्ते

कोरबा | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के कोरबा में रहने वाले एक संताल आदिवासी बच्चे की शादी मकर संक्रांति के दिन कुतिया से कराई गई. कोरबा से बाल्को जाने के मार्ग में स्थित बेलगिरी में ओडिशा मूल के संताल आदिवासी रहते हैं. उनमें एक अजीब सी मान्यता है कि यदि बच्चे का उपर का दांत पहले निकलता है तो उसे अशुभ माना जाता है.

संताल आदिवासियों के बीच ऐसी मान्यता चली आ रही है कि बच्चे का उपर का दांत पहले निकलने का अर्थ है उसके जीवन में मृत्यु दोष है. जिसे टालने के लिये बच्चे की शादी कुत्ते या कुतिया के साथ कराई जाती है. इसके बाद गांववालों को भोजन भी कराया जाता है.

यह शादी मकर संक्रांति के दिन या होली के दिन ही होती हैं. इसे ‘सेता बपला’ कहते हैं. सेता का अर्थ कुत्ता तथा बपला का अर्थ शादी होता है.

संताल आदिवासी मूलतः ओडिशा के मयूरभंज के रहने वालें हैं. वहां पर उनकी शादी मृत्यु दोष को टालने के लिये पेड़ से कराई जाती थी परन्तु वह पेड़ यहां पर नहीं होता इसलिये बच्चे की शादी कुत्ते से कराई जाती है.

आदिवासी मान्यता के अनुसार बच्चे की शादी कुतिया से तथा बच्ची की शादी कुत्ते से कराई जाती है. शादी के बाद कुत्ता या कुतिया को गांव को बाहर छोड़ दिया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे वह कुत्ता या कुतिया मर जाते हैं तथा बच्चा दोष मुक्त हो जाता है.

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार छोटे बच्चों को जब दांत निकलता है तो वह उपर या नीचे से पहले निकल सकता है. इसे किसी तरह की बीमारी का लक्षण नहीं माना जाता है.

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