छत्तीसगढ़ में रेत माफिया कर रहे मनमानी

Sunday, October 20, 2013

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रेत उत्खनन

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ में रेत माफिया इन दिनों बेखौफ होकर रेत उत्खनन करने में जुटे हुए हैं. सरकारी महकमे की अकर्मण्यता के चलते ये माफिया राज्य के कई जिलों के नदी-नालों से बेधड़क रेत का उत्खनन कर रहे हैं.

इसके चलते राज्य का आम आदमी अपनी जरूरत के लिए निर्धारित कीमत पर भी रेत पाने के लिए तरस रहा है. मकान, दुकान, नाली, रोड समेत हर तरह के निर्माण कार्यो के लिए आवश्यक रेत का टोटा है.

सूबे के जिलों में तैनात प्रशासन व खनिज विभाग की अनदेखी की वजह से 60 रुपये रायल्टी पर मिलने वाला एक ट्रेलर रेत 1500 रुपये में भी नहीं मिल रहा है. कई खदाने अवैध रूप से भी संचालित हो रही हैं. आपत्ति करने पर गांव में सरपंचों को मारने तक की भी धमकी दी जाने लगी है.

धमतरी, बेमेतरा, दुर्ग, बालोद और बलौदाबाजार जिलों में रेत की माफियाओं ने मनमर्जी की कीमत कर रखी है. सूबे के धमतरी जिले में अभी एक भी रेत खदान स्वीकृत नहीं है, फिर भी यहां रेत कहां से निकल कर आती है यह एक सवाल है. खनन विभाग के पास इसका जवाब नहीं है.

यही हाल बेमेतरा जिले का है जहा माफियाओं ने एक तरह से रेत खदानों पर कब्जा कर रखा है.जिले के कई स्थानों में बड़े पैमाने पर रेत का अवैध स्टाक भी बनाया गया है. यहां से बड़े पैमाने पर रेत की आपूर्ति ऊंची कीमत पर की जाती है.

बेमेतरा जिले के ग्राम लाटा सरपंच विजय साहू ने कहा, “रेत माफियाओं को दस बार से भी ज्यादा अवैध रेत खनन रोकने के लिए मना किया जा चुका है, उलटे वे मुझसे अश्लील गाली-गलौज कर मारने की धमकी देते हैं, जिससे मैं भी दहशत में हूं. इसकी जानकारी मैंने संबंधित खनिज विभाग कार्यालय बलौदाबाजार में पदस्थ अधिकारी शुक्ला बाबू को दी तो उन्होंने मुझे कार्रवाई का केवल आश्वासन दिया.”

बलौदाबाजार-भाटापारा के जिला खनिज अधिकारी एसएसनाग ने पूछने पर कहा कि माइनिंग इंस्पेक्टर को भेजकर तत्काल कार्रवाई कराता हूं.

डौंडी के समीप ग्राम उकारी, काडे, कुरूटोला, पटेली, पचेडा, कुआंगोदी, लिमऊडीह, पुसावड़, रजोलीडीह, मगरदाह, मरदेल सहित अंदरूनी क्षेत्रों में ट्रैक्टर, मेटाडोर, ट्रक, हाइवा आदि वाहन रिजर्व क्षेत्र में घुसकर प्राकृतिक संपदा की खुदाई एवं परिवहन कर शासन को लाखों रुपये की क्षति पहुंचा रहे हैं.

पूर्व में संबंधित ग्राम पंचायतें 90 रुपये प्रति ट्रक रायल्टी काटकर पंचायत फंड में राशि जमा कराती थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय से नदी-नालों से रेत खनन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से पंचायतों ने अपना हाथ खींच लिया है.

डौंडी-लोहारा की एसडीएम रोक्तिमा यादव ने कहा की क्षेत्र में रेत का परिवहन कहां-कहां हो रहा है, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी.

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