छत्तीसगढ़ का ‘लापतागंज’, रायपुर!

Monday, March 9, 2015

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रायपुर रेलवे स्टेशन

रायपुर | विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गत पांच वर्षो में सबसे ज्यादा बच्चे, लड़किया तथा महिलायों के लापता होने की खबर है. बकौल सरकारी आकड़े छत्तीसगढ़ से पिछले पांच सालों में जितने बच्चे, लड़किया तथा महिलाये लापता हुई हैं उनमें से राजधानी रायपुर सबसे टॉप पर है. रायपुर को यह रुतबा इसलिये मन को सालता है क्योंकि यहीं पर पुलिस तथा प्रशासन के मुख्यालय स्थित हैं. जाहिर है कि ऐन पुलिस मुख्यालय वाले शहर से यदि राज्य में सबसे ज्यादा बच्चे, लड़किया तथा महिलायें गुम होती हैं तो मन तो करेगा कि सुरक्षा के लिये राज्य के अन्य शहरों की ओर रुख किया जाये.

पिछले पांच सालों में राज्य से जितने बच्चे लापता हुए हैं उनमें सबसे ज्यादा रायपुर से 16.7 फीसदी गायब हुये हैं इसी तरह से लड़कियो तथा महिलाओं की पिछले पांच सालों में राज्य से जितनी गुमशुदगी हुई है उसका 16.9 फीसदी रायपुर से ही हुआ है.

छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले से साल 2010 से लेकर 6 फरवरी 2015 तक 2358 बच्चे तथा 3329 लड़कियां तथा महिलायें लापता हुई हैं.

राजधानी रायपुर के बाद लापता बच्चे, लड़किया तथा महिलायों की संख्या न्यायधानी बिलासपुर में दूसरे नंबर पर है. बिलासपुर जिले से पिछले पांच सालों में 1446 बच्चे तथा 1498 लड़किया तथा महिलायें गायब हुई हैं. राज्य से कुल जितने बच्चे पिछले पांच सालों में लापता हुयें हैं उनमें बिलासपुर जिले से 10.2 फीसदी तथा लड़कियां तथा महिलायें 7.6 फीसदी लापता हुई हैं.

सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ से पिछले पांच सालों में कुल 14,118 बच्चे तथा 19,670 लड़कियां तथा महिलायें लापता हुई हैं.

सबसे हैरत की बात है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिलों में बच्चों तथा लड़कियों के लापता होने की संख्या तथा प्रतिशत रायपुर एवं बिलासपुर के बनस्पित काफी कम है.

सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ के जशपुर से पिछले पांच सालों में 533 बच्चे, जगदलपुर से 365, दंतेवाड़ा से 82, कांकेर से 241, कोण्डागांव से 99, बीजापुर से 59, नारायणपुर से 39 तथा सुकमा से 38 बच्चों के लापता होने की खबर है.

यदि इन आकड़ों को छत्तीसगढ़ से कुल लापता बच्चों के प्रतिशत के रूप में देखा जाये तो जशपुर से 3.7 फीसदी, जगदलपुर से 2.5 फीसदी, दंतेवाड़ा से 0.5 फीसदी, कांकेर से 1.7 फीसदी, कोण्डागांव से 0.7 फीसदी, बीजापुर से 0.4 फीसदी, नारायणपुर से 0.2 फीसदी तथा सुकमा से 0.2 फीसदी बच्चों के लापता होने की खबर है.

जहां तक लड़कियों तथा महिलाओं के लापता होने की संख्या है जशपुर से 318, जगदलपुर से 477, दंतेवाड़ा से 133, कांकेर से 506, कोण्डागांव से 187, बीजापुर से 53, नारायणपुर से 43 तथा सुकमा से 12 लड़किया तथा महिलायें गायब हुई हैं.

इन आकड़ों को भी यदि राज्य के कुल लापता लड़कियों तथा महिलाय़ों की संख्या से तुलना करें तो ज्ञात होता है कि जशपुर से 1.6, जगदलपुर से 2.4, दंतेवाड़ा से 0.6, कांकेर से 2.5, कोण्डागांव से 0.9, बीजापुर से 0.2, नारायणपुर से 0.2 तथा सुकमा से 0.06 फीसदी लड़किया तथा महिलाओं के गायब होने की खबर है.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी की लगातार शिकायतों के बीच प्रमुख लोकायुक्त शंभूनाथ श्रीवास्तव ने सितंबर माह में ही कहा था कि जेलों में बंद कैदी अपने साथियों से मानव तस्करी करा रहे हैं. उन्होंने बताया था कि लोक आयोग के पास छत्तीसगढ़ के 6,525 बच्चों के लापता होने की शिकायत आई है. अधिकांश मामलों में बच्चों से भीख मंगवाया जा रहा है.

श्रीवास्तव ने कहा था कि इसके लिए रेलवे स्टेशन को ठिकाना बनाया गया है. इसे रोकने में जीआरपी कमजोर नजर आती है. मानव तस्करी के गैंग को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है.

प्रमुख लोकायुक्त ने मानव तस्करी रोकने के उपायों को लेकर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए यह बात कही थी. पिछले 10-15 वर्षो से यह अपराध कुछ संगठित संस्थाओं द्वारा सुनियोजित ढंग से किया जा रहा है. यह विषय इतना गंभीर है कि स्वयं सर्वोच्च न्यायालय इसकी निगरानी कर रहा है.

उन्होंने बताया था कि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में मानव व्यापार की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं. इन तीनों राज्यों में सरकार और प्रशासन निश्चित रूप से इसकी रोकथाम के लिए लगातार सजग और सतर्क है.

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