फ्लाइट में छेड़छाड़, बुजुर्ग गया जेल

Friday, November 28, 2014

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जेल

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के रायपुर में अदालत ने हवाई यात्रा के दौरान एक किशोरी से छेड़छाड़ के मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी बजुर्ग की जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह घटना डेढ़ माह पहले की है, जब किशोरी अपने माता-पिता के साथ जेट एयरलाइंस की फ्लाइट से मुंबई से रायपुर आ रही थी. छेड़छाड़ के इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी माना पुलिस ने इस मामले को दबाए रखा. यहां तक कि डीएसआर में भी घटना की जानकारी नहीं दी गई.

डेढ़ माह बाद पुलिस ने मध्य प्रदेश के सिहोर निवासी आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

माना थाना के टीआई हितेंद्र ताम्रकार का कहना है कि आरोपी को एक सप्ताह पहले ही गिरफ्तार किया गया है. एफआईआर रात 8 से 9 बजे के बीच की है. इसलिए डीएसआर रिपोर्ट में नहीं आ पाई. दूसरे दिन उसे भेजा गया. लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. एफआईआर के बाद बच्ची सदमे में थी. 15 दिन बाद वापस आई. इस कारण कार्रवाई में देरी हुई है.

अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी रामकुमार धीमान उम्र-51 वर्ष भोपाल के पास सिहोर का रहने वाला है. घटना के दिन पीड़िता अपने माता-पिता के साथ मुंबई से रायपुर लौट रही थी और आरोपी पीड़िता के बगल सीट पर बैठा था. यात्रा शुरू होने के बाद आरोपी बुजुर्ग उससे छेड़छाड़ करने लगा. पीड़िता ने विरोध किया, फिर भी आरोपी अश्लील हरकतों से बाज नहीं आया.

रायपुर पहुंचने के बाद पीड़िता ने घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी. तब उन्होंने माना थाना में अरोपी रामकुमार धीमान के खिलाफ छेड़छाड़ की रिपोर्ट लिखाई. पुलिस ने धारा 354 और लैंगिग अपराध व बाल संरक्षण अधिनियम की धारा-8 के तहत अपराध दर्ज कर लिया. लेकिन पुलिस ने तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की. डेढ़ माह के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है.

बुधवार को माना पुलिस ने अभियुक्त को अपर सत्र न्यायाधीश सुमन एक्का की अदालत में पेश किया, जहां पर आरोपी की ओर से जमानत याचिका लगाई गई. आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अरोपी 51 साल का है और वह निर्दोष है. उसे झूठा फंसाया गया है.

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आरोपी रामकुमार अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य है, जिसके नहीं रहने से उसके परिवार के सामने जीवनयापन की समस्या खड़ी हो जाएगी. इसके बावजूद अभियोजन ने आरोपी की जमानत अर्जी का विरोध किया.

अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति गंभीर है और जमानत देना उचित नहीं है. अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए आरोपी को 4 दिसंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.

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