नक्सली इलाके में पुलिस बनाएगी सड़क

Monday, September 16, 2013

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छत्तीसगढ़ पुलिस

धमतरी | संवाददाता: धमतरी जिले के सीतानदी अभ्यारण से नक्सलिय़ों को खदेडऩे की पुलिस की मंशा पर इलाके की कमजोर अधोसंरचना ने बुरा प्रभाव डाला है. इससे निपटने के लिए अब पुलिस विभाग ने खुद ही इलाके की सड़कें बनाने का मन बनाया है.

सूत्रों की माने तो पुलिस प्रशासन के सामने क्षेत्र में पक्की सड़के न होना नक्सलियों को भगाने में सबसे बड़ रोड़ बन कर उभरी है. क्षेत्र में आवागमन के सुगम मार्ग नहीं होने के कारण नक्सली बड़े आराम से वहां अपनी गतिविधियां चला रहे हैं.

अभी पुलिस को सूचना मिलती है, तो घटना स्थल तक पहुंचने के लिए ƒघंटों लग जाते हैं, तब तक नक्सली सावधान हो जाते हैं. क“च्ची सड़क होने के कार‡ण एम्बुश का खतरा भी हमेशा बना रहता है. लिहाजा वाहन उपयोग खतरनाक साबित हो सकता है. पुलिस चाहती है कि इन सभी गांवों को पक्के सड़क से जोड़ा जाये. इसके बाद नक्सली आपरेशन आसान हो जायेगा. इसलिए अब पुलिस विभाग सड़क बनवाने एय्शन Œलान तैयार कर रही है.

एसपी अकबरराम कोर्राम ने क्षे˜त्र के हालात से उ“न अधिकारियों को अवगत कराते हुए विस्तृत जानकारी दी है. उनका कहना है कि नक्सल प्रभावित टायगर रिजर्व में सड़क ही नहीं है. पगडंडी के खिलाफ अभियान चलाने में जवानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

बहीगांव, सीतानदी, खल्लारी का क“च्चा रोड मेचका से रिसगांव जाने के लिए रास्ता आसान नहीं है. 22 किलोमीटर जंगल व पहाड़ी रास्ते में है, तो बोराई से खल्लारी की दूरी 30 किलो मीटर दूर है. जगह ƒघुमावदार होने के कार‡ण पुलिस जवानों को एक क्षे˜त्र से दूसरे क्षे˜त्र जाने के लिए ƒघुमकर जाना पड़ता है.

बिरनासिल्ली से फरसगांव खल्लारी की दूरी 20 किलोमीटर है. चमेदा, मासूलखोई, भैंसामुड़ा जैसे कई गांव तक पहुंचने के लिए ƒघुमावदार “सड़क है. इतना ही नहीं उस क्षे˜त्र में ओडिशा बार्डर तक के सड़कों के हालत ऐसे ही हैं.

पुलिस अधिक्षक अकबरराम कोर्राम की मानें तो टायगर रिजर्व में सड़क ही नहीं है. इसलिए पुलिस द्वारा प्रपोजल की तैयारी किया जा रहा है. उ“न अधिकारियों के निर्देश प्राŒत हो, तो इसकी प्रक्रिया शुरु कराई जाएगी.

उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग द्वारा पक्की सड़के बनाने एक्शन Œलान तैयार तो किया जा रहा है, लेकिन रिजर्व फारेस्ट इसमें अर्चन पैदा कर रहे है. क्योंकि हाल ही में इस इलाके के 34 गांव में प्रशासनिक स्वीकृति के बाद भी फारेस्ट विभाग ने काम करने नहीं दिया.

ऐसे में पुलिस व फारेस्ट विभाग के बीच टकराव की नौबत आ रही है. बरसात के मौसम में पुलिस की ओर से नक्सलिय़ों के खिलाफ अभियान एक तरह से ठंडा बस्ता में चला गया है.