नक्सलवाद की बलिवेदी पर 14 शहीद

Tuesday, December 2, 2014

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नक्सली

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ में जारी नक्सलियों के आत्मसमर्पण से बौखलाये नक्सलियों ने सोमवार को सीआरपीएफ के गश्ती दल पर हमला कर दिया. उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में 26 नवंबर को 63 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था. आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में इस वर्ष अक्टूबर तक 283 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है. जाहिर है कि इससे बस्तर में समानांतर सरकार चलाने का दावा करने वाले नक्सली संगठन में हड़कंप मचना स्वभाविक था. सोमवार को सीआरपीएफ जवानों पर नक्सलियों के हमले को इससे जोड़कर देखा जा रहा है. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार को नक्सलियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के गश्ती दल पर घात लगाकर हमला कर दिया, जिसमें डिप्टी कमांडेंट और सहायक कमांडेंट सहित कम से कम 14 जवान शहीद हो गए. हमले में पांच जवान जख्मी हुए हैं. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, नक्सल ऑपरेशन आरके विज ने जवानों के शहीद होने की पुष्टि करते हुए कहा कि इनमें दो अधिकारी शामिल हैं. इन 14 सीआरपीएफ के जवानों को मिलाकर इस वर्ष 53 सुरक्षाकर्मी नक्सलवाद की बलिवेदी पर चढ़ गये हैं.

यह हमला कासलपाड़ा क्षेत्र में चिंतागुफा क्षेत्र में एलमागुंडा में किया गया. जानकारी के मुताबिक गांव वालों की आड़ में नक्सलियों ने यह हमला सुबह साढ़े दस बजे किया था.

जानकारी के अनुसार तलाशी अभियान के दौरान नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया. ये जवान नक्सलियों के खिलाफ संयुक्त ऑपरेशन के बाद लौट रहे थे.

घने जंगल और पहाड़ियों वाले इलाके में नक्सलियों ने पुलिस और सैन्य बलों को घेरकर हमला किया. जवान संयुक्त ऑपरेशन के तहत शनिवार को रवाना हुए थे.

जवानों की शहादत की पुष्टि एडीजी नक्सल ऑपरेशन आरके विज ने की हैं. एडीजी विज ने इसे कम्युनिकेशन नाकामी बताया है.

बस्तर संभागीय मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, नक्सलियों के खिलाफ लगातार सीआरपीएफ और पुलिस बलों के बढ़ते दबाव के बीच नक्सलियों ने यह हमला किया है.

बस्तर आईजी ने 14 जवानों के शहीद होने की पुष्टि की है. डिप्टी कमांडेंट और सहायक कमांडेंट भी इस हमले में शहीद हुए हैं. हमले के बाद अनेक जवानों के क्षेत्र में फंसे होने की जानकारी मिली है. मुठभेड़ स्थल पर सैन्य बलों का सर्चिग अभियान चल रहा है.

मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने इस हमले की कड़ी निंदा की है. कुछ खबरों के अनुसार कसलनार में मुठभेड़ के दौरान जवान शहीद हुए.

बताया जाता है शहीद हुए सभी जवान सीआरपीएफ के हैं. एरिया डॉमिनेशन जवानों में सीआरपीएफ के साथ कोबरा और जिला पुलिस जवान भी थे. कोबरा की 206 वीं और सीआरपीएफ की 223 वीं बटालियन इस अभियान में शामिल थी.

घटना के बाद सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी ने मुख्यालय पर आपातकालीन बैठक भी बुलाई है.

इस हमले के बाद कासलपाड़ा में सीआरपीएफ और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ कुछ देर बाद तक जारी रही थी. शहीद जवानों के शवों को बरामद कर लिया गया है. हमले में घायल पांच जवानों को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल भेजा गया है.

उल्लेखनीय है कि इस इलाके में पिछले दो माह से नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चल रहा था. हमला ठीक उसी जगह हुआ है, जहां पर 21 नवंबर को सीआरपीएफ ने पंद्रह नक्सलियों को मार गिराया था.

जवानों के शवों को लेने के लिए जब इलाके में हेलीकॉप्टर को भेजा गया तो नक्सलियों ने हेलीकॉप्टर पर भी गोलियां चलाई.

सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को सुकमा का दौरा कर सकते हैं. राजनाथ ने हमले पर शोक व्यक्त करते हुए इसे कायरना हरकत बताया है.

वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस और सैन्य बलों को इस मामले में कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने भी इस हमले की निंदा की है. नक्सलियों की इस कायराना करतूत की सूबे में चौतरफा निंदा की जा रही है.

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा कि पिछले कुछ समय से नक्सलियों के खिलाफ सैन्य बल लगातार दबाव बनाए हुए हैं, उसी से चिढ़कर नक्सलियों ने यह हमला किया.

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के अनुसार संबंधित इलाका नक्सलियों के प्रभुत्व वाला है. घने जंगल वाले इलाके में नक्सलियों ने हमले को अंजाम दिया. उन्होंने कहा कि सैन्य बलों की रणनीति में कहीं कमी रह गई.

जंगलों में घिरे 60 जवान अब तक नहीं लौटे
छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के खिलाफ संयुक्त ऑपरेशन पर निकले सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और डीएफ के जवानों की तीन पार्टियां सोमवार देर रात तक जंगलों में फंसी थीं. पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 60 जवान जंगलों से वापस कैंप तक नहीं पहुंच पाए हैं. इस बीच आला अधिकारियों की बैठक जारी हैं.

एडीजी नक्सल ऑपरेशन आरके विज ने बताया कि चिंतागुफा से दस किलोमीटर दूर कसलनार के पास नक्सलियों ने निशाना बनाया. इन सघन जंगलों में शनिवार से सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और डीएफ के जवान संयुक्त रूप से सर्चिग पर निकले थे.

उन्होंने बताया कि जंगल में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पुलिस टीम के पास थी. इसे देखते हुए ही ऑपरेशन किया जा रहा था. विज ने बताया कि जवानों के पास पर्याप्त बैकअप है. कुछ टीम अभी लौटी नहीं है. उसके आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी.

गौरतलब है कि यह घटना उस समय हुई, जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्यूरो के पदाधिकारी जगदलपुर के दौरे पर थे.

बताया जा रहा है कि नक्सली भी सैकड़ों की संख्या में थे और जवानों को घेरकर तीन घंटे से ज्यादा समय तक फायरिंग की गई. नक्सली दो दिसंबर से पीएलजीए सप्ताह मनाने की तैयारी में थे. इसको लेकर सुकमा और आसपास के इलाकों में नक्सलियों ने पर्चे भी फेंके थे.

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