सांप की गंध सूंघ लेता है शंकर

Wednesday, July 9, 2014

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सांप

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में एक ऐसा सपेरा इन दिनों सुर्खियों में है जो सूंघकर सांप को पकड़ लेता है. आमतौर पर सुनने में आता है कि जानवर या जीव-जंतु गंध से दूर की वस्तु को पहचान लेते हैं, पर कोई आदमी गंध से सांप की जगह को पहचान ले, यह अचरज की बात है, मगर सच है. वह सपेरा अपनी सूंघने की ताकत से सांप को पकड़कर लोगों को खेल दिखाता है.

जिले के ग्राम सिलयारी निवासी मोहम्मद शंकर नामक इस सपेरे का कहना है कि करीब तीन साल से रायपुर जिले के अलावा कई जगहों पर जाकर लोगों से सांप के रहने की जगह पूछता है और वहीं से तुरंत बीन बजाकर सांप को पकड़कर ले आता है और गांव में खेल दिखाकर सांप को जंगल में छोड़ आता है. यह उसका रोज का काम है. यह सपेरा इन दिनों समीपस्थ ग्राम पिसीद में लोगों को अपना खेल दिखा रहा है.

समीपस्थ ग्राम पिसीद निवासी कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांप जिस जगह पर रहता है उस स्थान को शंकर करीब 50 से 100 मीटर दूर से वहां की मिट्टी की गंध सूंघकर पहचान लेता है और उस स्थान पर जाकर बीन बजाता है. फिर सांप बाहर निकल आता है. हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि सांप के पास कान नहीं होते और वह बीन जैसी किसी भी आवाज़ को सुन नहीं सकता.

सपेरे शंकर का कहना है कि सांप जब बिल में घुसता है तो उसके पेट का निशान मिट्टी पर पड़ता है. उस जगह से गंध उसकी नाक में आ जाती है. इसी से पहचान कर सांप की जगह तक पहुंच जाता है और उसे पकड़ लेता है. यह विद्या उन्होंने बंगाल के अपने गुरु से सीखा है. वह करीब तीन वर्ष से अनेक गांवों में जाकर लोगों को यह खेल दिखाता चला आ रहा है.

उसने बताया कि वह सांप पकड़ने का काम आषाढ़ से कार्तिक माह तक ही करता है. इस बीच प्रत्येक वारों का भी समय रहता है. जैसे रविवार को सुबह 6 से 9 बजे तक, गुरुवार और शुक्रवार को दिनभर तथा बाकी दिनों में एक या दो घंटे का समय रहता है. उसी बीच में सांप पकड़ते हैं.

वह रोजाना करीब 3 से 5 सांप पकड़ लेता है और लोगों को खेल दिखाने के बाद उसे जंगल में छोड़ देता है. उसने लोगों को सांप डसने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने और उसी के अनुसार दवाई का उपयोग करने की बात कही.

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