कोरबा: ट्रक ने 2 बहनों को रौंदा, 1 की मौत

Thursday, April 16, 2015

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कोरबा | अब्दुल असलम: गुरुवार की दोपहर कोहडिय़ा मार्ग पर एक तेज रफ्तार ट्रक चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए सड़क किनारे चल रही दो बहनों को अपनी चपेट में ले लिया. इस हादसे में छोटी बहन की मौका स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई. बड़ी बहन को गंभीर अवस्था में उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. दुर्घटना के बाद लोगों में आक्रोश व्याप्त है. पुलिस ने दुर्घटनाकारित वाहन को जब्त करते हुए आरोपी चालक के खिलाफ अपराध कायम कर लिया है.

जानकारी के अनुसार सीएसईबी चौकी क्षेत्र अंतर्गत मानसनगर भैंस खटाल निवासी अमृत सागर की बड़ी पुत्री द्वितीया सागर 15 वर्ष व ईशिता उर्फ बेबी 7 वर्ष पैदल कोहडिया की ओर से मानस नगर आ रहे थे. जहां कोहडिया के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क किनारे चल रही दोनों बहनों को अपनी चपेट में ले लिया. इस हादसे में ईशिता उर्फ बेबी को गंभीर चोट आई और मौका स्थल पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई. वहीं बड़ी बहन द्वितीया को गंभीर रूप से चोट आई है. जिसे आनन-फानन में उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई. हादसे के बाद स्थानीय लोगों द्वारा जमकर गुस्सा दिखाया गया. फिलहाल पुलिस ने वाहन को जब्त करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. बताया जाता है कि दुर्घटना के समय वाहन की रफ्तार काफी तेज थी. जिसके कारण चालक ने वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया. जिससे बेकाबू ट्रक ने सड़क किनारे चल रही दोनों बहनों को अपनी जद में ले लिया. बताया जाता है कि दुर्घटनाकारित वाहन दर्री की ओर से कोरबा आ रही थी. बच्चियां भी उसी तरफ से मानस नगर अपने घर आ रही थी. दोनों एक ही तरफ थे, जिसके कारण यह हादसा हुआ.

मार्ग पर पहले भी हो चुके हैं हादसे
कोहडिय़ा मार्ग पर पहले भी कई हादसे घटित हो चुके हैं. मार्ग पर घटित हुए हादसों में कई लोगों की मौत हो चुकी है. मार्ग पर 24 घंटे भारी वाहनों का आवागमन होता है. जिसकी रफ्तार काफी तेज होती है. जिसके कारण अधिकांश भारी वाहनों की चपेट में आ जाने से लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं.

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस दुर्घटना के बाद परिवार के सदस्यों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है. दुर्घटना में एक बच्ची की मौत हो गई. वहीं दूसरी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झुल रही है. दुर्घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं स्थानीय लोगों की आंखे भी नम है.

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