कोरबा: ईलाज को तरसती राष्ट्रीय खिलाड़ी

Saturday, November 1, 2014

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राजेश्वरी लहरे

कोरबा | अब्दुल असलम: छत्तीसगढ़ के कोरबा में राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रौशन करने वाली राजेश्वरी बीमारी की हालात में अस्ताल में भर्ती है. राजेश्वरी ने खेल के मैदान में राज्य का नाम राष्ट्रीय स्कर पर रौशन किया है. फिलहाल कभी खेल के मैदान में दूसरी टीम को बैकफुट पर जाने को मजबूर करने वाली छत्तीसगढ़ के कोरबा की एक राष्ट्रीय खिलाडी आज बीमारी की कारण खुद ही बैकफुट पर हैं. गरीबी के कारण महंगे ईलाज के लिये परिवार को दर-दर भटकना पड रहा हैं. खेल के प्रति सर्मापित खिलाडी के परिवार के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वो अपनी बीमारी का खर्च उठा सके.

रोजी मजदूरी करने वाले परिवार की लाडली राजेश्वरी जूडो और म्यो थाई बाक्सिंग में कोरबा और छत्तीसगढ़ का नाम रौशन कर चुकी हैं. स्वस्थ्य होकर पढ़ाई के साथ-साथ आगे खेलने कि चाहत रखती हैं. अपने जिंदगी के लिये राजेश्वरी ने मदद की गुहार लगाई हैं.

छत्तीसगढ़ के कोरबा के निजी अस्पताल के बिस्तर में उपचार करा रही राष्ट्रीय खिलाडी राजेश्वरी लहरे दअसरल कुसमुंडा निवासी तुलाराम लहरे की बेटी है तथा 11 कक्षा की छात्रा हैं. गौरतलब है कि राजेश्वरी लहरे पिछले कुछ महीनों से बीमार हैं. दमा बीमारी से ग्रसित राजेश्वरी के फेफडे में इंफेक्शन हो गया हैं. आज के महंगाई के दौर में रोजी मजदूरी करने वाले उसके पिता तुलाराम के पास इतने पैसे नहीं हैं कि अपनी बेटी का पूरा ईलाज करा सके. तुलाराम लहरे के पास जो कुछ जमा पुंजी थी वो इलाज में लगा चुके हैं.

इधर राजेश्वरी के हौसले इतने बुलंद हैं कि बीमारी से ठीक हो कर फिर से खेलना और आगे पढ़ना चाहती हैं लेकिन परिवार की मौजूदा हालात उसके इलाज और पढ़ाई के बीच दीवार बन रहे हैं.

राजेश्वरी का पुरा परिवार अपनी बेटी के बीमारी को लेकर चिंतित हैं. इधर उसकी मां प्रेम बाई ने भी शासन-प्रशासन से मदद करने की अपील की हैं. जिला खेल अधिकारी रामकृपाल साहू ने खेल विभाग से राजेश्वरी के इलाज के लिये मदद करने की बात कह रहे हैं.

कहते हैं मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता हैं ठीक इसी बात को सही साबित करते हुये न्यू कोरबा हास्पिटल के डॉक्टरों ने राजेश्वरी के जीवन की रक्षा करते हुये उसके परिवार वालो की माली हालत को देखते हुये महंगे इलाज को रियायत दर पर इलाज कर रहे हैं. डॉ. आशीष अग्रवाल ने राजेश्वरी के इलाज के लिए सरकार और समाज सेवी संगठनो से अपील की है.

राजेश्वरी ने खेल के मैदान में कोरबा और छत्तीसगढ़ का नाम जूडो और म्यो थाई बाक्सिंग में दो बार गोल्ड मैडल लाकर रौशन कर चुकी हैं लेकिन बीमारी ने उसे ऐसा जकडा की उससे उभर पाने में परिवार की लाचारी सक्षम नजर नही हैं. अब देखना होगा की शासन, प्रशासन और खेल विभाग इस होनहार खिलाड़ी के जीवन की रक्षा करने में कितने मददगार साबित होते हैं.

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