छत्तीसगढ़: बदहाल आदिवासी छात्रावास

Saturday, September 24, 2016

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कांकेर | अंकुर तिवारी: कांकेर के आदिवासी छात्रावास में बच्चें बदहाली में तामील ले रहें हैं. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित आदिवासी बालक छात्रावास में रहने वाले बच्चों को पेयजल, साफ-सफाई, जर्जर भवन सहित मूलभूत समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. छात्रों ने अपनी समस्याओं से कई बार अफसरों को अवगत कराया, लेकिन आला अधिकारियों के कान में जू तक नहीं रेंगी.

कानागांव के छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाले 47 बच्चों के लिए दो कमरों में 21 बिस्तर की व्यवस्था की गई है. बदइंतजामी के चलते रात में बच्चे ठीक से सो नहीं पा रहें है. बिस्तर की कमी के कारण एक बेड पर दो या तीन छात्रों को एक साथ सोकर रात गुजारनी पड़ रही है. ये बच्चे कई बार सोते समय बिस्तर से जमीन पर गिर जाते है.

छात्रावास की छत जर्जर हो चुकी है, बारिश होने पर छत से पानी टपकता रहता है. बावजूद इसके छत की मरम्मत कराने के लिए ध्यान नहीं दिया जा रहा है. छात्रावास में शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं होने के कारण आदिवासी बच्चों को आयरन युक्त पानी से अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है. परिसर में लगे हैंडपंप से फ्लोराइड युक्त पानी आ रहा है. जानकारी के लिए बता दें कि फ्लोराइड युक्त पानी के सेवन से शरीर में दर्द होने लगता है तथा दांत पीले होकर गिरने लगते है.

आदिवासी छात्रावास के मिड डे मील की स्थिति बेहद खराब है. यहाँ दाल के नाम पर सिर्फ पानी परोसा जा रहा है. बच्चों की थाली में रखे गए भोजन के स्तर को देखकर बता पाना मुश्किल है कि दाल में पानी है या पानी में दाल है. बच्चों को मैन्यू के अनुसार भोजन नहीं परोसा जा रहा है. इसका असर बच्चों की सेहत पर पड़ता दिख रहा है. मध्यान्ह भोजन खाने के बाद बच्चों को स्वयं ही थाली को धोना पड़ता है.

यहाँ महज दो शिक्षकों के भरोसे छात्रों की पढ़ाई हो रही है, एक शिक्षक का पद आज भी खाली है, जिसे भरने की मांग लंबे समय से की जा रहीं है. पिछले दो साल से छात्रावास में लगाया गया कंप्यूटर रख-रखाव के अभाव में खराब हो गया है. खराब कंप्यूटर को न तो सुधारा गया और न ही नए कंप्यूटर की व्यवस्था की गई है.

यह कहना गलत नहीं होगा कि आदिवासी बालक आश्रम में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्र बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं. शासन प्रशासन के लाख दावों के बाद भी यहाँ के आदिवासी बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है.

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