‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’

Tuesday, September 9, 2014

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‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’

रायपुर | संवाददाता: वन सम्पदा से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ के वनों में लोगों को जीवन देने वाली मूल्यवान आयुर्वेदिक वनौषधियों का व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो गया है. जो विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए रामबाण साबित हो रही हैं. वनौषधि उत्पादन के इस कार्य में बड़ी संख्या में स्थानीय वनवासी परिवारों को रोजगार भी मिल रहा है. वनौषधियों को अच्छी आकर्षक पैकेजिंग के साथ राज्य शासन द्वारा ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के ब्रांड नाम से बाजार में उतारा गया है. इस ब्रांड नाम के साथ इन उत्पादों को आयुर्वेदिक डॉक्टरों , मरीजों और ग्राहकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है.

राजधानी रायपुर में गांधी उद्यान के नजदीक जी.ई. रोड पर स्थित ‘संजीवनी’ में पिछले वित्तीय वर्ष 2013-14 में इन प्रसंस्करण केन्द्रों से प्राप्त वनौषधियों की लगभग 34 लाख 77 हजार रूपए की बिक्री हुई. वनोपज संघ के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इसे मिलाकर रायपुर के संजीवनी रिटेल आउटलेट में नौ साल में करीब दो करोड़ 17 लाख रूपए की वनौषधियों की बिक्री हो चुकी है.

रायपुर के अलावा जिला मुख्यालय दुर्ग, बिलासपुर, अम्बिकापुर, कांकेर और जगदलपुर में भी संजीवनी केन्द्र रिटेल आउटलेट संचालित किए जा रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि ये सभी वनौषधियां कई प्रकार के बीमारियों के इलाज में कारगर साबित हो रही है, जैसे गिलोय चूर्ण का इस्तेमाल चर्मरोग, वातरक्त ज्वर, पीलिया और रक्ताल्पता में काफी उपयोगी है. तुलसी चूर्ण का उपयोग सर्दी-खांसी, कृमिरोग, नेत्र रोग आदि में किया जा सकता है.

जामुन-गुठली चूर्ण का इस्तेमाल मधुमेह की बीमारी में काफी लाभदायक है. जोड़ों के दर्द, कमर दर्द, बदन दर्द आदि वात रोगों में महाविषगर्भ तेल का उपयोग किया जा सकता है. च्यवनप्राश का उपयोग शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ाने में किया जा सकता है.

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