छत्तीसगढ़ की ‘मधुशाला’

Sunday, January 17, 2016

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'मधुशाला'

रायपुर | समाचार डेस्क: रायपुर निवासी गोविंद देव अग्रवाल द्वारा रचित ‘काश मैं तेरी आंखें होता’ हरिवंश राय बच्चन की ‘मधुशाला’ की तरह है. नवीन उपमाओं एवं अद्भुत कल्पनाओं के सागर में डूबा यह काव्य पाठकों को प्रेम खुशी व रोमांच से सराबोर करने में सक्षम है.

अग्रवाल का यह काव्य आंखों के जरिए भौतिकता से प्रारंभ कर आध्यात्मिकता एवं दर्शन की ओर ले जाते हुए जीवन के कई गूढ़ रहस्यों को उजागर करता है.

गोविंद देव अग्रवाल ने अपने काव्य संग्रह के बारे में बताया कि यह पुस्तक उनकी 20 वर्षो की मेहनत है, जो अपने आप में अद्भुत एवं अद्वितीय होने के साथ ही हिंदी काव्य जगत में मील का पत्थर साबित होगी.

पिछले दिनों राजधानी के एक निजी होटल में रोटरी क्लब के कान्फ्रेंस में पधारे प्रख्यात शायर मुनव्वर राणा ने इसका विमोचन किया. कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा, महापौर प्रमोद दुबे, स्वरूपचंद जैन, सनत जैन आदि उपस्थित थे.

अग्रवाल ने कहा कि इस काव्य संग्रह में 160 पद हैं. प्रख्यात चित्रकार डी.डी. सोनी ने इस काव्य के प्रत्येक पद का भावपूर्ण चित्रांकन किया है, जो इस पुस्तक को अनुपम स्वरूप प्रदान करता है. मुनव्वर राणा ने भी इस पुस्तक की प्रशंसा की है.

अनूप जलोटा व महेंद्र कपूर ने भी दिया है स्वर :

एक व्यवसायी होते हुए भी गोविंद देव अग्रवाल काव्य रचना के साथ ही संगीत में भी गहरी रुचि रखते हैं. वे श्रेष्ठ वायलिन वादक हैं. उन्होंने देश के कई नगरों के साथ ही विदेशों में भी अब तक 30 प्रस्तुतियां दे चुके हैं. वहीं उनकी लगभग 10 पुस्तकें प्रकाशन के लिए तैयार है. बहुमुखी प्रतिभा के धनी अग्रवाल की कलम में तुलसी, सूर, कबीर जैसी गहराई देखने को मिलती हैं, वहीं आधुनिकता की छाप भी है.

उन्हें दोहे लिखने में विशेष महारत है. अब तक वे पांच हजार दोहे और 300 गीत, गजल, भजन लिख चुके हैं. इनके भजनों को अनूप जलोटा और महेंद्र कपूर जैसे गायकों ने भी गाया है. इसके साथ ही अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के लिए प्रांतगान की भी रचना की है, जिसका मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने विमोचन किया था.

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