आलोक अग्रवाल सहित 6 निलंबित

Sunday, January 4, 2015

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महानदी भवन- मंत्रालय

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने शनिवार रात को जल संशाधन विभाग के छः अफसरों को निलंबित कर दिया है. उन सभी पर भ्रष्ट्राचर में लिप्त होने के आरोप हैं. निलंबित अधिकारियों में हसदेव बांगो कछार के अधीक्षण अभियंता बृजराज दास वैष्णव भी शामिल हैं, जिन्हें आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने पांच लाख रूपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था और उन्हें अपराध पंजीबद्धकर 30 दिसम्बर 2014 को गिरफ्तार भी किया गया था.

उन्हें 48 घण्टे से अधिक समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रखे जाने के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम-1966 के प्रावधानों के तहत निलंबित किया गया है. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय रायपुर स्थित जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में निर्धारित किया गया है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संसाधन विभाग के छुई खदान स्थित कार्यपालन अभियंता मक्सी कुजूर को 54 हजार रूपए रिश्वत लेते पकड़े जाने के कारण हुई गिरफ्तारी और उनके विरूद्ध दर्ज एफ.आई.आर. तथा 48 घण्टे से ज्यादा समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रखे जाने के कारण निलंबित कर दिया है. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय महानदी परियोजना रायपुर के मुख्य अभियंता कार्यालय में रहेगा.

इसी कड़ी में खारंग जल संसाधन संभाग जिला बिलासपुर के सहायक अभियंता आलोक अग्रवाल और उसी जिले के तीन उप अभियंता जी.आर. देवांगन, अबरार बेग और विजय कुमार सिंह ठाकुर को भी निलंबित कर दिया गया है. निलंबन अवधि में आलोक अग्रवाल का मुख्यालय महानदी परियोजना रायपुर के मुख्य अभियंता कार्यालय में तथा तीनों निलंबित उप अभियंताओं का मुख्यालय महानदी गोदावरी कछार रायपुर के मुख्य अभियंता कार्यालय में निर्धारित किया गया है.

इन सभी प्रकरणों में पीसी एक्ट 1988 के प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज किए गए हैं. निलंबन की कार्रवाई भी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम-1966 के तहत की गई है.

ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत राज्य के सभी विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतों को तत्काल संज्ञान में लेने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि रिश्वत और करोड़ों रूपयों की अनुपातहीन संपत्ति के मामलों में एफ.आई.आर. होते ही आरोपी शासकीय सेवकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाए.

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