प्राची, रजनी को मिले यूनिफार्म

Tuesday, August 12, 2014

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स्कूल

कोरबा | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर के पांचवी की प्राची, सुमन, रजनी, लक्की और रिक्की को 15 अगस्त से पहले मुफ्त में स्कूल यूनिफार्म मिले हैं. छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों में निःशुल्क स्कूल यूनिफार्म देने की योजना का लाभ मोतीसागर पारा के प्राथमिक शाला को भी मिला.

गौरतलब है कि कोरबा शहर के मोतीसागर पारा में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला में कुल 150 बच्चे पढ़ाई करते हैं. हसदेव नदी के मुहाने में बसे इस झुग्गी बस्ती में ज्यादातर परिवार आर्थिक रूप से बेहद गरीब है और रोज की कमाई का जरिया परिश्रम पर टिका हुआ है.

यहां कक्षा पांचवीं में पढ़ने वाली पायल के पिता नहीं है घर में छोटे-छोटे दो भाई बहन हैं. पांचवी की प्राची भारती, सुमन, रजनी, लक्की और रिक्की समेत कई अधिकांश बालक-बालिकाएं ऐसे हैं जिनके माता पिता ही न सिर्फ बहुत गरीब है उनके लिए घर चलाना और पढ़ाई का खर्च उठा पाना भी बहुत मुश्किल है.

इन परिस्थितियों में उनके बच्चों को सरकार द्वारा निःशुल्क किताबें और ड्रेस मिलना उनके आर्थिक बोझ को कम करता है. स्कूल में पढ़ाई करने वाले एक बच्ची की सिर्फ मां है और वह घरों में बर्तन साफ कर घर चलाती है. प्राची के पिता सीट, गद्दी बनाकर परिवार का भरण पोषण करते है.

सुमन के पिता सुकलाल मजदूरी करते हैं. वहीं रजनी के पिता चौकीदारी और लक्की के पिता हलवाई का काम कर बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजते हैं. रिक्की यादव के पिता नहीं है. एक बालिका के पिता जूते चप्पल बनाकर अपनी बच्ची को भविष्य बनाने का आस लिए उसे स्कूल भेजते हैं. यहां स्कूल में पढ़ाई करने वाले ज्यादातर बच्चों के परिवारों की पृष्ठभूमि गरीबी से जुड़ी हैं.

ऐसे में शासन द्वारा शिक्षा को प्रोत्साहन देने मुफ्त किताबें, यूनिफार्म, छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन देने जैसी पहल ने सभी की नई उम्मीदों को जीवित रखा है. सुमन के पिता सुकलाल का कहना है कि स्कूल ड्रेस खरीदने के लिए बच्ची की बातें दिल में टीस करती थी. 15 अगस्त में नया ड्रेस पहनकर स्कूल जाने की इच्छा सभी बच्चों की होती है. अब ठीक पहले नया ड्रेस मिल जाने से उसकी बच्ची को जितनी खुशी नहीं हुई होगी, उसे हो रहा है.

घरों तथा विभिन्न आयोजनों में बर्तन धोकर अपने बच्चे को पढ़ा रही एक विधवा ने बताया कि पति के मौत के पश्चात सभी की जिम्मेदारी उस पर है. वह अपने बच्चे को कुछ बनाना चाहती है लेकिन कई बार गरीबी की वजह से दुखी हो जाती है. स्कूल जाने से पहले नया स्कूल ड्रेस, किताबों और जूते, चप्पल के साथ पैसे मांगने पर वह चिंतित हो जाती थी. कपड़े के लिए तंग करते थे.

अब नया कपड़ा मिलने से उसकी चिंता कम हो गई. उसका कहना है “कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम से गरीब बच्चे जरूर एक दिन पढ़ लिखकर अपनी भविष्य बना सकेंगे.”

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