खतरे में हैं 15 विधायक

Tuesday, September 3, 2013

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चंद्रशेखर साहु

रायपुर । विशेष संवाददाता: छत्तीसगढ़ की 90 में से 15 सीटों पर विधायक खतरे में हैं. ये वो सीटें हैं, जिन पर चुने गये विधायकों की जीत का अंतर इतना कम रहा है कि इस बार के चुनाव में अगर हालत वैसे ही रहे तो विधायक जी विधानसभा में नहीं पहुंच पायेंगे. ऐसा इसलिये भी क्योंकि कई विधायक तो पहले की तुलना में और भी कमजोर होते चले गये हैं और जनता उन्हें सबक सिखाने के मूड में है.

राज्य में ऐसी 15 सीटों में से 7 भाजपा के पास है तो 8 पर कांग्रेस के विधायक का कब्जा है.

2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा तथा कांग्रेस के मतों का अंतर महज 1.70 प्रतिशत था. जिसका अर्थ यह होता है कि कांग्रेस यदि 0.85 प्रतिशत मत और पा जाये तो दोनों की स्थिति विधानसभा में बराबर की हो जायेगी.

जिन सीटों पर मतों का अंतर बेहद कम था, उनमें भाजपा के लिये चांपा, अभनपुर, आरंग, दुर्ग, गुंडरदेही, अंतागढ़ तथा बस्तर की सीटें हैं. इसी तरह कांग्रेस के लिये अंबिकापुर, सीतापुर, कोंटा, भिलाई नगर, कोरबा, रायपुर उत्तर, दुर्ग ग्रामीण तथा पंडरिया विधानसभा में खतरे की घंटी बज रही है.

भाजपा के कई मंत्री इन विधानसभाओं से आये हैं. भाजपा के मंत्रियों में कृषि मंत्री चन्द्रशेखर साहु, सिंचाई मंत्री हेमचंद यादव, वन मंत्री विक्रम उसेंडी तथा संसदीय सचिव नारायण चंदेल इसी श्रेणी में आते हैं.

इसी तरह कांग्रेस के टी एस बाबा 2008 के विधानसभा चुनाव में महज 980 मतों से जीते थे. उन्होंने अपने निकटतम प्रत्याशी भाजपा के अनुराग सिंहदेव को 0.74 प्रतिशत से मात दिया था. जबकि 2003 के विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा के कमल भान सिंह 37,222 मतों से विजयी रहे थे.

कांग्रेस के ही सीतापुर से विधायक अमरजीत भगत ने 1737 मतों से विजय प्राप्त की थी. उन्हें भाजपा के गणेशराम भगत से 1.49 प्रतिशत मत ज्यादा मिले थे. 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से ही अमरजीत 5,102 से जीते थे. पांच वर्षो में कांग्रेस के मतों में गिरावट आयी थी.

चांपा विधानसभा से 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के नारायण चंदेल 1,190 मतो से जीते थे. उन्होंने अपने निकटतम प्रत्याशी कांग्रेस के मोतीलाल देवांगन से 1.09 प्रतिशत मत ज्यादा पाया था. 2003 के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के मोतीलाल 7,710 मतों से विजयी रहे थे.

भाजपा के कृषि मंत्री चन्द्रशेखर साहु अभनपुर से कांग्रेस के धनेन्द्र साहु को 1,490 मतों से हरा कर विधानसभा पहुंचे थे और मंत्री का पद पाया है. चन्द्रशेखर साहु 2008 के विधानसभा चुनाव में 1.24 प्रतिशत अधिक मतो से जीते थे. इस अभनपुर विधानसभा क्षेत्र से 2003 के चुनाव में कांग्रेस के धनेन्द्र साहु केवल 227 मतो से जीते थे.

आरंग विधानसभा से कांग्रेस के गुरु रुद्र कुमार 1.23 मतों से जीते थे. इन्होंने अपने निकटतम प्रत्याशी भाजपा के संजय ढीढी को 1,337 मतो से हराया था. इसी आरंग विधानसभा क्षेत्र से 2003 के चुनाव में भाजपा के संजय ढीढी 18,444 मतों से विजयी रहे थे.

2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कवासी लखमा, कोंटा से मात्र 192 मतों से जीते थे. उन्हें भाजपा के पदम नंदा से मात्र 0.28 प्रतिशत मत ज्यादा मिले थे. जबकि इसी विधानसभा से कवासी लखमा पिछले 2003 के चुनाव में 17,398 मतो से जीते थे. बस्तर की 12 में से कोंटा अकेली सीट है, जिस पर कांग्रेस का कब्जा है.

भाजपा के सिंचाई मंत्री हेमचंद यादव दुर्ग से मात्र 702 मतो से जीते थे. उन्हें अपने निकटम प्रत्याशी कांग्रेस के अरुण वोरा से 0.61 प्रतिशत मत ज्यादा मिले थे. 2003 के विधानसभा चुनाव में हेमचंद यादव के जीत का अंतर 22,573 था. जिसका निष्कर्ष यह हुआ कि 2003 से 2008 आते-आते जीत का अंतर अत्यंत कम हो गया था.

गुंडरदेही विधानसभा से भाजपा के वीरेन्द्र कुमार साहु, कांग्रेस के घनाराम साहु से 2,585 मतो से जीते थे. यहां भी जीत के मतों का प्रतिशत 1.85 प्रतिशत था. इसी गुंडरदेही विधानसभा से कांग्रेस के घनाराम साहु भाजपा के रामशीला साहु से 9,290 मतों से हारे थे. पांच वर्षो में कांग्रेस की हार का अंतर कम हो गया था.

नयी बनी विधानसभाओं में 2008 में कोरबा से कांग्रेस के जयसिंह मात्र 587 मतो से जीते थे. उनके जीत में 0.57 प्रतिशत का अंतर था. इसी तरह रायपुर शहर उत्तर से कांग्रेस के कुलदीप सिंह जुनेजा ने भाजपा के सच्चिदानंद उपासने को 1,436 मतो से हराया था. कुलदीप सिंह जुनेजा को 1.48 प्रतिशत मतो की बढ़ोतरी मिल पाई थी.

दुर्ग ग्रामीण से कांग्रेस की प्रतिमा चंद्राकर 1557 मतो से जीती थी. उन्हें अपने निकटतम प्रत्याशी भाजपा के प्रीतपाल बेलचंदन से 1.37 प्रतिशत मत ज्यादा मिले थे. दूसरी ओर पंडरिया से कांग्रेस के मोहम्मद अकबर ने अपने निकटतम प्रत्याशी भाजपा के लालजी चंद्रवंशी को मात्र 186 मतो से हराया था. उनके जीत के मतों का प्रतिशत 1.11 था.

भाजपा के वनमंत्री विक्रम उसेंडी भी कांग्रेस के मनतूराम पवार से मात्र 109 मतों से जीते थे. यहां जीत के मतो का अंतर 0.13 प्रतिशत था. बस्तर से भाजपा के डा. सुभाउ कश्यप कांग्रेस के लखेश्वर बघेल से 1201 मतो से जीते थे. उनके जीत का अंतर 1.24 प्रतिशत था.

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