फुड़हरढाप के कुंवारे, कुवांरे रहेंगे

Wednesday, November 12, 2014

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शादी की रस्म

रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में एक गांव है फुड़हरढाप. गांव का नाम कुछ अजीब तरह का है न! इस गांव की समस्याएं भी अजीब तरह की हैं. सबसे बड़ी समस्या है युवकों का विवाह होना. युवकों के माता-पिता के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं. चिंता इस बात की है कि बेटे की शादी कैसे होगी, परिवार आबाद कैसे रहेगा, क्योंकि इस गांव में कोई अपनी बेटी के लिए रिश्ता लेकर नहीं आता. बेटियों का विवाह हो जाता है, मगर बेटे कंवारे रह जाते हैं.

फुड़हरढाप गांव मुरूमसिली बांध के पानी से चारों ओर से घिरा है. इस गांव तक आने-जाने का एक मात्र साधन नाव ही है. ग्रामीण कहते हैं कि गांव टापू बना हुआ है. कहीं बाहर निकलना मुश्किल है. नाव से आखिर कोई कितनी दूर जाएगा. गांव में रोजगार का साधन नहीं है. खेत हमेशा डूबे रहते हैं, कोई फसल हो तो कैसे?

ग्रामीणों ने बताया कि पहले रिश्ते आते थे, इधर कुछ वर्षो से रिश्ते आने बंद हो गए हैं. शायद आने-जाने का साधन नहीं होने के कारण रिश्ते जोड़ने से लोग कतराते हैं. उन्होंने कहा, “हम अफसरों से इस गांव को किसी दूसरी जगह बसाने की फरियाद लगा रहे हैं, कोई सुन नहीं रहा है.”

गांव की महिला किसुनकली ने कहा, “तीन जवान बेटे हैं, मगर लगता नहीं कि कभी बहू का मुंह देख पाऊंगी.”

फुड़हरढाप के बाशिंदे पुरुषोत्तम नेताम, साधूराम नेताम, डेरहाराम साहू, किसुनराम, रामलाल, चिंताराम और शिवराज ने जो व्यथा बताई, उसका निचोड़ यह है कि गांव में अगर किसी के पास एक-दो एकड़ खेत है तो उसमें पानी भर जाने से फसल बर्बाद हो जाती है. रोजी-रोटी के लिए दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ता है. आवागमन का साधन नहीं होने के कारण अन्य गांव के लोग यहां बेटी का ब्याह कराना नहीं चाहते.

ग्रामीण चाहते हैं कि शासन अन्य स्थान पर जगह उपलब्ध कराकर वहां इस गांव को बसा दे.

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