छत्तीसगढ़: सामूहिक खुदकुशी, 2 मरे

Monday, September 19, 2016

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korba suicide

कोरबा | अब्दुल असलम: छत्तीसगढ़ के कोरबा में तंगी के चलते पूरे परिवार ने खुदकुशी का कदम उठाया. जिसमें दो बहनों की मौत हो गई है तथा लकवाग्रस्त मां की स्थिति गंभीर बनी हुई है. भाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. मिली जानकारी के अनुसार कोरबा में आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक ही परिवार के चार लोगों ने पहले तो जहर खाया फिर फांसी के फंदे लटकने की खोशिश की, उसमें सफल नहीं होने पर कुयें में कूदकर गये.

यह हृदयविदारक घटना कटघोरा थाना क्षेत्र के छुरी निवासी चावल व्यवसायी व फ्लोर मिल संचालक फूलचंद अग्रवाल के निवास में रविवार की रात हुई. फूलचंद के साथ उसका भांजा नवल अग्रवाल अपने परिवार के साथ रहता था. 10 साल पहले भांजे नवल की मौत हो गई थी. उसके बाद से नवल की पत्नी सरोज अग्रवाल और दो बेटी 24 वर्षीय रानू, 22 वर्षीय रश्मि व बेटा 20 वर्षीय शुभम फूलचंद के साथ ही रह रहते थे.

रविवार की रात 10.30 बजे सरोज ने तीनों बच्चों के साथ घर में ही चूहामार दवा का सेवन लिया. दवा खाने से बात नही बनी तो घर में ही साड़ी से फांसी के फंदे में लटक कर सामूहिक जान देने की खोशिश की. जब उसमें सफल नहीं हुये तो रानू, रश्मि व शुभम घर के आंगन में स्थित कुयें में कूद गये.

घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के लोगों में हड़कंप मच गया. कुयें में कूदे तीनों बच्चों को आनन-फानन में निकाला गया. इस दौरान रानी व रश्मि की मौत हो गई. वहीं सरोज व शुभम को गंभीर हालात में इलाज के लिए कोरबा के कोसाबाड़ी स्थित जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

घटना की जानकारी मिलते ही एसडीओपी संजय महादेवा व टीआई विवेक शर्मा घटनास्थल पहुंच गये. बताया जा रहा है कि नवल की मौत के बाद सरोज व बच्चों को फूलचंद अग्रवाल खर्च के लिए राशि नहीं देते थे.

इधर मृतका के मामा ने पूरे मामले में गड़बड़ी का सन्देह जताते हुए कहा कि प्रशासन पुलिस निष्पक्ष जांच करे.

परिवार में टूटे पहाड़ के बावजूद पड़ोस में ही रहने वाले रिश्ते के चाचा धन्वन्तरि अग्रवाल ने पूरे रिश्ते को तार-तार करते हुए दोनों भतीजी का शव लेने इंकार कर दिया.

सामूहिक सुसाइड की जानकारी लगते ही कटघोरा पुलिस मौके पर पहुच कर कुये से तीनों भाई बहनों निकाला. जिसमे दो बहनें रानू और लक्ष्मी की मौके पर मौत हो गई थी. भाई शुभम और माँ सरोज को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उपचार के बाद शुभम को छुट्टी दे दी गई. वही लकवा ग्रसित माँ सरोज की हालत गंभीर बताई जा है.

पुलिस को दिये बयान में शुभम ने बताया की वे और उनके परिवार आर्थिक तंगी और तनाव से गुजर रहे थे जिसके कारण सामूहिक रूप से निर्णय लेकर तकलीफ से मुक्ति पाने अपनी जान देना ही सहज समझा और चारों ने एक साथ जहर खा लिया.

भूखमरी और आर्थिक तंगी ने एक ही परिवार चार सदस्यों को मौत के आगोश में जाने को मजबूर कर दिया. जिसमें बहनों की मौत हो गई.

इस घटना से पारिवारिक आर्थिक तंगी पर कई खड़े हो रहे है. एक तरफ मृतिका के मामा घर की सम्पति को लेकर शंका जाहिर कर रहे है तो वही दूसरी तरफ मृतिका के चाचा डेडबॉडी लेने से इंकार कर रहे. ऐसे में देखना है होगा की पीएम रिपोर्ट और पुलिस के जांच में क्या निकालकर सामने आता है.

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