गैर वन क्षेत्र से कोयला निकाले

Sunday, October 4, 2015

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ओमपुरी-अभिनेता

रायपुर | संवाददाता: अभिनेता ओम पुरी ने छत्तीसगढ़ के गैर वन क्षेत्रों से पहले कोयला निकालने पर जोर दिया है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शनिवार को सीसीएस द्वारा आयोजित परिचर्चा की शुरुआत करते हुये उन्होंने कहा कि देश में 72 फीसदी कोयला गैर वन क्षेत्रों में है तथा 27 फीसदी कोयला वन क्षेत्रों में है. उन्होंने उद्योगपतियों से आग्रह किया कि पहले कोयला गैर वन क्षेत्रों से निकाले.

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सालों से कोयले के लिये वनों को उजाड़ देने के फलस्वरूप हाथी रहवासी इलाकों में भोजन की तलाश में आकर उत्पात मचाते हैं. जिससे कई ग्रामीण मारे गये हैं तथा उनके घरों एवं अनाज को नुकसान पुहुंचा है.

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव सहित अन्य विशेषज्ञों ने वायर फेंसिंग, हाथियों के लिए कॉलर आईडी लगाने जैसे उपायों को बेकार बताया. टीएस सिंहदेव ने कहा कि हाथी कोई छुपने वाला जानवर नहीं है, बल्कि दूर से ही दिख जाता है. वन विभाग के बीट गार्ड से लेकर तमाम मैदानी अमले मोबाइलों से लैस हैं. ऐसे में कॉलर आईडी लगाकर उन्हें ट्रैक करने की जरूरत क्या है. इसी तरह हाथी फेंसिंग पर पेड़ गिराकर आराम से निकल जाते हैं.

राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड के सदस्य पीएस ईसा ने कहा है कि वन विभाग में हाथियों को समझने वाले नहीं हैं. मानव हाथी संघर्ष के लिए जो भी योजना बन रही है, वह कारगर साबित होने के बजाय उल्टे संघर्ष को बढ़ा रही है.

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण तथा जैव विविधता की रक्षा के लिए वनों और वन्य जीवों की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि मानव और वन्य जीवों के बीच संघर्ष का मुख्य कारण समन्वय की कमी है. जनता भी सरकार का ही हिस्सा है. इसलिए जंगलों और जंगल के जीव-जंतुओं के संरक्षण के कार्यो में जन सहयोग भी बहुत जरूरी है.

अमर अग्रवाल ने इस अवसर पर बस्तर अंचल के वरिष्ठ समाजसेवी दामोदर कश्यप को सम्मानित किया. श्री कश्यप बस्तर जिले के बकावंड विकास खंड के संध करमरी गाँव के रहने वाले है और विगत 35 वर्षों से भी ज्यादा समय से वनों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस तरह के परिचर्चाओं से सरकार को नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग मिलता है. उन्होंने आश्वासन दिया कि आज के विमर्श में वन और वन्य जीवों के हित में जो भी निष्कर्ष सामने आएगा राज्य शासन द्वारा निश्चित रूप से उन पर विचार किया जाएगा.

परिचर्चा में सम्मानित किए गए बस्तर जिले के दामोदर कश्यप के बारे में बताया गया कि उन्होंने तेजी से खत्म हो रहे जंगलों को बचाने के लिए बस्तर अंचल की थेंगापल्ली नामक अपनी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवित किया. थेंगा पल्ली परंपरा में जंगलों की रक्षा करना प्रत्येक ग्रामवासी का कर्तव्य है. जंगलों को बचाने की अपनी दृढ इच्छा शक्ति और गाँव वालों सहभागिता से उन्होंने करीब छह सौ एकड़ की भूमि में जंगल का विकास किया है. इसमें से करीब 100 एकड़ जमीन में जडी बूटी और अनेक बहुमूल्य औषधियों का जंगल विकसित किया है. जिसे पवित्र जंगल का नाम दिया गया है.

यहाँ उन्होंने अपनी पारंपरिक देवी का मंदिर भी स्थापित किया है. इस जंगल में वृक्षों को काटने की सख्त मनाही है. श्री कश्यप ने बताया कि इन जंगलों उन्होंने आम सागौन, हर्रा आदि के वृक्ष भी रोपित किये हैं और उन्हें गाँव के युवाओं का भी पूरा सहयोग मिल रहा है. अभिनेता ओमपुरी ने कहा कि जंगल हमारा जीवन हैं और अपने जीवन की रक्षा के लिए हम सभी को पेड़ लगाने चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया हमें अपने घरों में और घरों के आसपास जहाँ भी खाली जमीन हो पेड़ जरूर लगाने चाहिए. ऐसे ही छोटे छोटे प्रयासों से ही हम अपने जंगलों को बचा पाएंगे.

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