स्वास्थ्य बीमा पर छत्तीसगढ़ को झटका

Saturday, November 1, 2014

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मेडिकल टूरिज्म

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को तगड़ा झटका लगा है. राज्य सरकार ने इस योजना के तहत 30 हज़ार रुपये के बजाये 50 हज़ार रुपये तक की बीमा को मंजूरी दी थी और सरकार ने तामझाम के साथ इसका प्रचार भी करवाया था. लेकिन अब केंद्र सरकार ने ऐसी किसी भी बढोत्तरी से साफ मना करते हुये कहा है कि दिसंबर 2015 तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जाये.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 38,17,133 लोगों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा के तहत स्मार्ट कार्ड बांटा गया है और 413 निजी और 269 सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.

अभी तक राज्य में स्मार्ट कार्ड से 30 हज़ार रुपये तक का इलाज कराने की सुविधा रही है. हाल ही में राज्य सरकार ने इसे 50 हज़ार रुपये करने की घोषणा की थी. लेकिन केंद्र सरकार ने एक के बाद एक छत्तीसगढ़ को दिये जाने वाली सहायता राशि के बजट में कटौती करके राज्य की आर्थिक व्यवस्था को संकट में डाल दिया है.

छत्तीसगढ़ सरकार को पहला झटका महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना में लगा, जब 2014-15 की केंद्रीय मंज़ूरी के 2600 करोड़ रुपए में कटौती करते हुए केवल 1307 करोड़ रुपए मंज़ूर किए गए. यानी रोजगार गारंटी योजना के बजट में लगभग 55 फ़ीसदी कटौती कर दी गई.

राज्य सरकार ने पिछले साल ही मज़दूरी के दिन 150 करने की घोषणा की थी. ज़ाहिर है राज्य में रोजगार गारंटी योजना में पंजीकृत 42 लाख मज़दूरों के लिए यह कटौती मुश्किल पैदा करेगी.

इसके बाद मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत स्वीकृत 800 करोड़ में से भी 207 करोड़ काट लिए. इसके अलावा कृषि समेत दूसरे मदों में भी केंद्रीय मदद में कटौती कर दी गई.
राज्य में सबसे बड़ा झटका किसानों को लगा. उन्हें सहकारी बैंकों से मिलने वाले ऋण पर ब्याज दर एक से पांच फ़ीसदी के बजाय 12 फ़ीसदी कर दी गई. धान के समर्थन मूल्य और ख़रीदी की सरकारी नीतियों ने भी किसानों की मुश्किल बढ़ा दी.

सरकार अभी तक 1345 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदती रही है. रमन सिंह की सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2100 रुपए करने का वादा किया था.

पिछले 10 सालों से मुख्यमंत्री रमन सिंह किसानों का एक-एक दाना धान समर्थन मूल्य पर ख़रीदने का वादा दुहराते रहे हैं और उस पर अमल भी करते रहे हैं.

लेकिन समर्थन मूल्य बढ़ने की कौन कहे, नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही अनाज ख़रीदी के लिये समर्थन मूल्य देने से मना किया और उसका असर यह हुआ कि छत्तीसगढ़ में पिछले साल तक लगभग 80 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने वाली सरकार ने तय किया कि एक एकड़ में केवल 10 क्विंटल धान ही ख़रीदा जाएगा.

अब केंद्र की कटौती में स्वास्थ्य बीमा योजना भी आ गई है.

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