अपोलो अस्पताल में मानवता शर्मसार

Wednesday, September 7, 2016

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अपोलो अस्पताल-बिलासपुर

बिलासपुर | समाचार डेस्क: अपोलो अस्पताल में पैसे के लिये शव को 8 घंटों तक रोके रखा. मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को सुबह 11 बजे सड़क एक्सीडेंट में घायल अभनपुर निवासी सुनील संतानी ने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में दम तोड़ दिया था. जब परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया तो पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अपोलो प्रबंधऩ बिलासपुर ने शाम 7 बजे शव को उसके परिजनों को सौंप दिया.

शाम 4 बजे तक सरकंडा पुलिस ने शव का पंचनामा बना लिया था परन्तु प्रबंधन बकाया रुपये जमा कराने की बात करता रहा. तब सरकंडा थाने के टीआई ने आकर शव को अपनी कस्टडी में लिया तथा शव को सिम्स की मरच्यूरी में भेजा.

सुनील के भाई दयाल संतानी के अनुसार उन्होंने अपोलो अस्पताल में 3 लाख रुपये जमा करा दिये थे. उनका भाई पिछले 5 दिनों से अस्पताल में भर्ती था. दयाल संतानी ने बताया कि उससे 5 और 6 सितंबर के बीच 50 हजार रुपयों की दवा मंगाई गई. उसके बाद प्रबंधन 24 घंटे के भीतर 2 लाख से ज्यादा और देने को कह रहा है. उल्लेखनीय है कि अपोलो प्रबंधन ने 3 लाख रुपये जमा करा देने के बाद 2 लाख 56 हजार रुपयों का और बिल दिया था.

परिजनों को आरोप है कि 2.56 लाख रुपयों के लिये शव को 8 घंटे तक रोके रखा गया. वहीं, अपोलो प्रबंधन बिलासपुर का कहना है कि मृतक के परिजनों ने 3 लाख रुपये दे दिये हैं तथा बाकी के बाद में दे देंगे. प्रबंधन का कहना है कि मृतक के परिजनों को कोई एक्सट्रा बिल नहीं दिया गया है. अपोलो प्रबंधन का यह भी कहना है कि चूंकि केस मेडिको लीगल था इसलिये पुलिस आने के बाद शव दिया गया.

इससे पहले भी अपोलो में इसी तरह की घटनायें घट चुकी है जब पैसे के लिये शव को रोके रखा गया था. इसी साल मार्च माह में कोरबा के एसईसीएल के रिटायर्ड कर्मचारी की 18 वर्षीय लड़की शांति धांधी के शव को 2 लाख 19 हजार रुपयों के लिये अपोलो प्रबंधन द्वारा रोकने की बात सामने आई थी. जिसे प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद छोड़ा गया था. शांति धांधी तीरंदाजी में राष्ट्रीय खेलों में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी थी.

अपोलो प्रबंधन के रवैये से सवाल उठता है कि क्या इलाज का खर्च देने में असमर्थ होने पर शव को रोके रखा जा सकता है? जाहिर है कि यह सवाल मानवता को शर्मसार करने वाली है परन्तु विश्व स्तरीय इलाज के नाम पर कॉर्पोरेट अस्पताल चलाने वाले मानवता के बजाये मुनाफे को वरीयता देते हैं यह जगजाहिर है.

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