बस्तर: बुलेट नहीं, मच्छर से खतरा

Sunday, November 30, 2014

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संक्रमित मच्छर

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में माओवादियों से जूझते जवान मलेरिया का दंश झेल रहें हैं. बस्तर के जंगलो में माओवादियो के अतिवाद का मुकाबला कर रहें सुरक्षा बलों के जवानों को इन जंगलों के सदियों पुराने खतरे से भी दो-चार होना पड़ रहा है. खतरा भी ऐसा है कि सुरक्षा बलों के जवानों को इनसे लड़ने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है. इसी कारण आज की तारीख में बस्तर में तैनात सुरक्षा बलों के 150 के करीब जवान जानलेवा मलेरिया से पीड़ित हैं.

उल्लेखनीय है कि ज्यादातर सुरक्षा बलों के जवान जानलेवा फैल्सीफेरम मलेरिया से पीड़ित हैं.

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार झीरम घाटी में बनाये गये नये कैंप के 8 जवान मलेरिया से पीड़ित हो गये हैं जिन्हे शुक्रवार को जगदलपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इनमें से 6 की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें हैलीकाप्टर से राजधानी रायपुर लाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इनमें से गोविंद तमगा को बचाया न जा सका तथा वह काल के गाल में समा गया है.

गौरतलब है कि बस्तर के जंगल के अंदरुनी हिस्सों में नक्सल विरोधी ऑपरेशन में लगे पुलिस के दो आला अफसरानों को भी इस जानलेवा बीमारी से जूझना पड़ रहा है. अतिरिक्ता पुलिस अधीक्षक सुरजीत कुमार तथा विजय पांडे मलेरिया से पीड़ित होने के कारण अस्पताल में भर्ती हैं.

मलेरिया से सबसे बदतर स्थिति दक्षिण बस्तर में है जहां के दोरनपाल, जगारगुंडा, कोटा, बासागुडा, आवापल्ली, टेमेड तथा मरदापाल में मलेरिया के दंश झेलने के बाद 17 जवीनों को हैलीकाप्टर से रायपुर चिकित्सा के लिये भेजा गया है.

सूत्रों के अनुसार वर्तमान में सुरक्षा बलों के 34 जवानों को मलेरिया से पीड़ित पाये जाने के बाद जगदलपुर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

सबसे हैरत की बात है कि बस्तर के जंगलों में माओवादियों से जूझ रहे जवानों को चिकित्सा के लिये जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज में समुचित सुविधा न होने के कारण बार-बार रायपुर के निजी अस्पतालों में लाकर भर्ती कराना पड़ता है.

बस्तर के जंगलों में एंटी-नक्सल आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आईजीपी एसआरपी कल्लूरी ने कहा कि सभी कैम्पों में मेडिकल किट, मलेरिया की जांच करने वाले उपकरण, मच्छरदानिया तथा मलेरिया की दवा कुनैन सप्लाई की गई है.

जाहिर है कि एंटी नक्सल मोर्चे पर तैनात सुरक्षा बलों के जवानों को दोहरे मोर्चे पर लड़ना पड़ रहा है.

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