छत्तीसगढ: उपचार को भटकता बैगा आदिवासी

Wednesday, March 18, 2015

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बैगा आदिवासी

रतनपुर | उस्मान कुरैशी: छत्तीसगढ़ में बैगा आदिवासियों के विकास और संरक्षण के नाम किए जा रहे करोड़ों रूपए खर्चो के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है. जहां उपचार के अभाव में कथित बुखार से पीड़ित एक बैगा युवक ने दम तोड़ दिया वहीं जंगली सूअर के हमले से घायल दूसरे युवक उपचार का पैसे के अभाव में उपचार नही हो पा रहा है.

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के बेलगहना चौकी क्षेत्र में ग्राम पंचायत कुरदर के छुईहा निवासी 25 वर्षीय बैगा आदिवासी युवक छोटे लाल के बाएं हाथ को जंगली सूअर ने हमला कर काट लिया है. छोटेलाल के मुताबिक वह अपने गांव छुईंहा से राशन लेकर 4 मार्च की दोपहर पैदल ड्यूटी पर जा रहा था. इसी दौरान बांकल के जंगल में जंगली सूअर ने उस पर हमला कर दिया. जिसमें उसके बाएं हाथ में गंभीर चोंटे आई है. किसी तरह वह जान बचाकर बांकल पहुंचा जहां साथियों की मदद से उसे उपचार के लिए अचानकमार के सरकारी अस्पताल लाया गया. जहां प्राथमिक उपचार के बाद कोटा सामुदायिक केन्द्र जाने की सलाह दी गई.

घटना के बाद वन विभाग के अफसरों ने तीन हजार की आर्थिक मदद की. जिससे वह दो बार उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोटा गया जहां डाक्टरों ने कुछ दवाएं देकर उसे सुई लगाई. इसके बाद उसके पास की जमा पूंजी खत्म हो गई. जिसके कारण युवक के हाथ का एक्सरे नही हो पाया और ना ही उसके हाथों में प्लास्टर बांधा गया. घायल युवक की हालत की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके हाथ का सूजन अब तक बना हुआ है. युवक छपरवा वन परिक्षेत्र के कूप क्रमांक 222 में पैदल गार्ड का काम करता है. जहां वन विभाग से उसे तीन माह का मानदेय भी नहीं मिला है.

सामाजिक कार्यकर्ता ज्ञानाधार शास्त्री ने युवक की गंभीर हालत को देखकर बुधवार को उसे उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रतनपुर लेकर आए. जहां डाक्टर ने उन्हे युवक के हाथ का एक्सरे कराने की सलाह दी. एक्सरे से युवक के हाथ टूटने की पुष्टि हुई है. फिलहाल अर्थाभाव के कारण युवक का उपचार अब तक नहीं हुआ है.

सामाजिक कार्यकर्ता ज्ञानाधार शास्त्री के मुताबिक छुईंहा के इन गरीब बैगा आदिवासियों के पास पैसे नही है. छोटे लाल का एक भाई बचन सिंह पिता राम सिंह को सप्ताह भर पहले सर्दी बुखार की शिकायत थी जिसका चार दिन पहले उपचार नहीं करा पाने की वजह से मौत हो गई.

उल्लेखनीय है कि बैगाओं आदिवासियों के संरक्षण और विकास के नाम पर प्रदेश सरकार एक पूरी परियोजना चल रही रही है. जिसके नाम पर अलग से करोड़ों रूपए के बजट भी स्वीकृत होते है पर इनका फायदा जमीनी तौर पर इन गरीब आदिवासियों कहीं मिलता नही दिख रहा है.

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