अंतागढ़: देश में सबसे ज्यादा ‘नोटा’

Sunday, September 21, 2014

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नोटा

रायपुर | विशेष संवाददाता: देश में 2014 के उपचुनावों में छत्तीसगढ़ का अंतागढ़ नोटा में अग्रणी रहा. गौरतलब है कि वर्ष 2014 में देश के 14 राज्यों में करीब 56 विधानसभाओं में हुए उपचुनावों में किसी विधानसभा में छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ के समान भारी मात्रा में नोटा के बटन नहीं दबे. यहां तक की साथ में हुए लोकसभा के उपचुनावों को भी अंतागढ़ ने नोटा के मामले में कड़ी टक्कर दी है.

इसमें सबसे हैरत की बात है कि एकमात्र छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ में जीतने वाले प्रत्याशी को मिले मतों की तुलना यदि नोटा से की जाये तो नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी को मिले कुल मतों का तुलना में 21.23 फीसदी का है जबकि देश के बाकी के उपचुनाव में इसका प्रतिशत जीतने वाले प्रत्याशी को मिले कुल मतों की तुलना में ज्यादातर 1 से 2 फीसदी के बीच में ही है. केवल गुजरात के लिमखेड़ा में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में 10.05 फीसदी का है. इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ में नोटा का इशारा क्या है.

शनिवार को छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ विधानसभा उपचुनाव के नतीजें आये जिससे पता चला कि अंतागढ़ में 13हजार 506 मतदाताओं ने ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ का विकल्प चुना था. जबकि इसी विधानसभा में वर्ष 2013 में हुए विधानसभा के समय 4हजार 710 मतदाताओं ने ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ का विकल्प चुना था.

उल्लेखनीय है अंतागढ़ के उपचुनाव में केवल 2 प्रत्याशी थे जिनमें से एक भाजपा तथा एक अंबेडकराईट पॉर्टी ऑफ इंडिया से थे. अंतागढ़ से भाजपा के प्रत्याशी को 63हजार 616 तथा अंबेडकराईट पॉर्टी ऑफ इंडिया के प्रत्याशी को 12हजार 86 मत मिले हैं. अंतागढ़ से बाकी प्रत्याशियों ने अपने नामांकन वापस ले लिये थे. इसके बाद अंतागढ़ के मतदाताओं द्वारा देश में सबसे ज्यादा नोटा का इस्तेमाल करना कहीं मतदाताओं की नाराजगी का संकेत तो नहीं है?

2014 के उपचुनावओं के आकड़ों पर गौर करे तो पता चलता है कि उत्तराखंड के डोईवाला में 542, धारचूला में 1028 तथा सोमेश्वर में 630 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 1.5, 3.2, 2.7 फीसदी का रहा है.

इसी तरह से कर्नाटक के चिक्कोदी-सदालगा में 953, बेल्लारी में 1,190 तथा शिकारीपुरा में 580 नोटा के बटन दबे. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 1, 1.4, 0.8 फीसदी रहा.

पंजाब के तलवंडी साबो में 580 तथा पटियाला में 623 वोट नोटा पर पढ़े. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 2.31, 2,1 फीसदी का था.

मध्य प्रदेश के बहोरीबंद में नोटा के 2963, विजय राघवगढ़ में 3189 तथा आगर में 2182 बटन दबे. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 3.86, 0.35, 2.79 फीसदी रहा.

इसी तरह से बिहार के नरकटियागंज में 1514, राजनगर में 2578, जाले में 2608, छपरा में 2467, मोहिउद्दीन नगर में 3448, परबत्ता में 3095, भागलपुर में 1187, बांका में 2550, मोहनिया में 1708 तथा हाजीपुर में 2719 मतदाताओं ने ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ का विकल्प चुना. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 2.34, 4.40, 6.59, 5.21, 6,13, 3.27, 1.86, 5.24, 2.77, 5.17 था.

राजस्थान में हुए उपचुनाव में सूरजगढ़ के मतदाताओं में से 1090 ने, वैर के 1219 ने, नसीराबाद के 1661 ने तथा कोटा दक्षिण के 2331 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 1.54, 1.57, 2.49, 2.76 फीसदी का रहा.

वहीं, त्रिपुरा के मानु में केवल 374 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में 1.71 फीसदी रहा. इसी तरह से सिक्किम के रानगांग यानगांग में 46 मतदाताओं ने नोटा पर भरोसा किया. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में 0.96 फीसदी रहा.

गुजरात के उपचुनाव में दीसा में 2762, मनीनगर में 1443, तनकारा में 2068, खमभालिया में 2267, मंगरोल में 1626, तलजा में 3395, आणंद में 2138, मतर में 2326 तथा लिमखेड़िया में 6641 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 3.73, 2.13, 3.18, 3.41, 2.44, 6.75, 2.81, 3.90, 10.05 फीसदी रहा.

देश के सबसे बड़े प्रदेश, उत्तर प्रदेश में सहारानपुर में 911, बिजनौर में 1474, ठीकुरद्वारा में 1115, नोएडा में 1846, निघासन में 2698, लखनऊ पूर्व में 1379, हमीरपुर में 3059, चकखारी में 3495, सिरायु में 1619, बलहा में 3464 तथा रोहनिया में 941 मतदाताओं ने ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ का विकल्प चुना. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 0.84,1.45, 1.00, 1.83, 2.60, 1.92, 2.70, 3.67, 2.06, 3.49, 1.23 फीसदी का था.

उधर, आंध्रप्रदेश में नंदीगामा में 1177 लोगों ने ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ का विकल्प चुना. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में 0.17 फीसदी था.

असम के सिलचर में नोटा के बटन 963 लोगों ने, लखीपुर में 1070 लोगों ने तथा जामुनमुख के 715 लोगों ने नोटा का विकल्प चुना. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 1.28, 2.73, 1.14 फीसदी रहा.

इसी तरह से पश्चिम बंगाल के बशीरहाट में 1254 तथा चौरंगी में 1171 लोगों ने ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ का विकल्प चुना. इस राज्य में नोटा, जीतने वाले प्रत्याशी की तुलना में क्रमशः 1.76, 3.05 रहा.

उल्लेखनीय है इन्हीं विधानसभा उपचुनावों के साथ हुए लोकसभा के उपचुनावों में गुजरात के वदोदरा में 14,257, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में 6636 तथा तेलंगाना के मेढक लोकसभा में 10,964 मतदाताओं ने ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ का विकल्प चुना. आकड़े बयां कर रहें हैं कि छत्तीसगढ़ का अंतागढ़ विधानसभा इनसे नोटा के मामले में टक्कर ले रहा है. केवल गुजरात के वदोदरा लोकसभा में ही अंतागढ़ से ज्यादा नोटा के बटन दबे जबकि उत्तर प्रदेश के मैनपुरी एवं तेलंगाना के मेढक लोकसभा तक में छत्तीसगढ़ के अंतागढ़ से कम मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना.

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